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देहरादून में 'हनुमान अंश' शो में नीम करौली बाबा के लिए खाली सीट, पर्दे पर आते ही जुड़ जाते हैं दर्शकों के हाथ

Published: Wed, 09 Sep 2026 09:52 PM (IST)

देहरादून के सिल्वर सिटी मल्टीप्लेक्स में 'हनुमान अंश' फिल्म के दौरान नीम करौली बाबा के लिए एक सीट खाली रखी ...और पढ़ें

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अंकुर अग्रवाल, जागरण देहरादून। सिनेमा हाल खचाखच भरा है... दर्शक पर्दे पर टकटकी लगाए बैठे हैं... लेकिन एक सीट खाली है। उस पर कोई बैठता नहीं। हर शो में वह सीट नीम करौली बाबा के लिए आरक्षित रहती है।

मानो श्रद्धालुओं के बीच बाबा स्वयं मौजूद हों और अपने जीवन की कथा को पर्दे पर देख रहे हों। दून के सिल्वर सिटी मल्टीप्लेक्स में इन दिनों ‘हनुमान अंश’ के शो के दौरान यह दृश्य सबसे ज्यादा भावुक करने वाला है।

बाबा के लिए खाली छोड़ी गई एक सीट फिल्म देखने आए दर्शकों के लिए महज कुर्सी नहीं, आस्था का प्रतीक बन गई है। फिल्म में नीम करौली बाबा के जीवन, उनकी आध्यात्मिक यात्रा, भक्ति, सेवा और करुणा से जुड़े प्रसंग दर्शकों को भीतर तक छू रहे हैं।

बाबा के व्यक्तित्व और हनुमान भक्ति से जुड़े दृश्य आते ही कई दर्शकों के हाथ जुड़ जाते हैं। कुछ श्रद्धालु नंगे पांव फिल्म देखने पहुंच रहे हैं तो कई पूरे शो के दौरान ही हाथ जोड़कर बैठे रहते हैं।

पर्दे पर बाबा के जीवन के प्रसंग आते हैं और सामने बैठे दर्शकों के चेहरे पर भाव बदल जाते हैं। कहीं आंखों में नमी दिखाई देती है तो कहीं श्रद्धा से झुका सिर।

फिल्म के जरिए बाबा की भक्ति, मानव सेवा और समर्पण का भाव जिस तरह सामने आता है, वह दर्शकों को केवल कहानी से नहीं, उनकी आस्था से जोड़ देता है।

पर्दा गिरता है, भक्ति नहीं

पर्दे पर कहानी खत्म होती है, रोशनी जलती है, दर्शक बाहर निकल जाते हैं, मगर बाबा के नाम छोड़ी गई वह सीट देर तक जैसे यही कहती रहती है, भक्ति में दूरी नहीं होती। फिल्म समाप्त होने के बाद भी यह भाव बना रहता है।

दर्शकों को लड्डू का प्रसाद दिया जा रहा है। साथ ही हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की पुस्तकें भी वितरित की जा रही हैं। फिल्म देखकर निकलते श्रद्धालुओं के हाथ में प्रसाद और भक्ति साहित्य का होना इस पूरे अनुभव को सिनेमा से कहीं आगे ले जाता है।
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खाली सीट में मौजूदगी का एहसास

हर शो में बाबा के लिए खाली रखी गई सीट इस पूरे आयोजन का सबसे अनूठा पक्ष है। दर्शकों से भरे हाल में एक सीट का खाली रहना हमेशा जैसे मौन में एक संदेश देता है कि बाबा यहां नहीं हैं, ऐसा मानना ही मुश्किल है।

श्रद्धालुओं की नजरें कभी-कभी पर्दे से हटकर उस सीट पर भी चली जाती हैं। यह बाबा का ही चमत्कार है कि फिल्म पूरे देश में 150 करोड़ से ऊपर की आय कर चुकी है। इसी उपलक्षय में हमारी ओर से दर्शकों को प्रतिदिन प्रसाद व हनुमान चालीसा व सुंदरकांड की पुस्तकों का वितरण किया जा रहा है।

सुयश अग्रवाल, निदेशक सिल्वर सिटी