Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    हाथियों के पेट तक पहुंच गया प्लास्टिक, देहरादून में डंग से मिले पालीथिन के सबूत

    Updated: Sun, 08 Feb 2026 12:24 AM (IST)

    देहरादून के वन क्षेत्र में हाथियों के मल में पहली बार पालीथिन मिली है, जिससे वन्यजीव विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है। यह दर्शाता है कि हाथी पालीथिन में ...और पढ़ें

    देहरादून वन क्षेत्र में हाथी के डंग में मिला प्लास्टिक। फोटो साभार भारतीय वन्यजीव संस्थान

    देहरादून वन क्षेत्र में हाथी के डंग में मिला प्लास्टिक। फोटो साभार भारतीय वन्यजीव संस्थान

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    सुमन सेमवाल, जागरण देहरादून। पालीथिन का बढ़ता प्रयोग पर्यावरण के लिए नित नई चुनौती तो खड़ी कर ही रहा है, अब वन्यजीव भी इस खतरे से अछूते नहीं हैं। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पहली बार हाथियों के डंग (मल) में पालीथिन के प्रमाण मिले हैं।

    इससे यह पता चलता है कि हाथी ऐसा भोजन भी कर रहे हैं, जो पालीथिन में लिपटा होता है। भोजन के माध्यम से पालीथिन हाथियों के पेट में जा रही है और फिर मल के साथ निकल रही है। मल में पालीथिन मिलने की घटना ने वन्यजीव विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।

    दरअसल, हाल में वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान की एक टीम ने आशारोड़ी-मोहंड क्षेत्र में अध्ययन के लिए भ्रमण किया था। उसी दौरान विज्ञानियों की नजर हाथियों के डंग पर पड़ी।

    plastic reached elephants stomach

    देखा कि डंग के साथ पालीथिन मिली हुई है। इसका एक वीडियो भी सामने आया है। यह वीडियो भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआइआइ) के विज्ञानियों तक भी पहुंचा।

    वरिष्ठ विज्ञानी डा. पराग निगम ने बताया कि यह मामला बेहद गंभीर है। इससे पता चलता है कि हाथी बहुल क्षेत्र राजाजी टाइगर रिजर्व, देहरादून वन प्रभाग और शिवालिक वन क्षेत्र से सटे देहरादून में कूड़ा जंगल व आसपास बिना निस्तारण के पड़ा रहता है।

    जिसमें पालीथिन भी होती है और सड़ा-गला भोजन भी। हाथी जैसे बड़े जीव बल्क में भोजन निगल लेते हैं, जिससे उसके साथ पालीथिन भी उनके पेट में जा रही है।

    plastic in elephants dung

    भोजन के साथ हाथियों का पालीथिन निगलना बेहद गंभीर है। उन्होंने कहा कि हाथियों की सुरक्षा के लिए कचरे का निस्तारण बेहतर ढंग से किया जाना अति आवश्यक है।

    पोषक तत्वों के अवशोषण को कम कर देती है पालीथिन

    विशेषज्ञों के अनुसार कचरे/भोजन के साथ पालीथिन निगलने से हाथियों और अन्य वन्यजीवों को भौतिक रूप से नुकसान हो सकता है।

    इससे भोजन से मिलने वाले पोषक तत्वों का अवशोषण प्रभावित हो सकता है। साथ ही यह वन्यजीवों के पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकता है।

    2022 में डंग के 32 प्रतिशत नमूनों में मिला था प्लास्टिक, सुधार के दावों को चुनौती

    वर्ष 2022 में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की एक टीम ने हरिद्वार और लैंसडौन वन प्रभाग में डंग(मल) के नमूने लेकर जांच की थी। जिसमें 32 प्रतिशत नमूनों में प्लास्टिक, एल्युमिनियम के अवशेष और एक में कांच के अंश भी पाए गए।

    खबरें और भी

    उसके बाद सरकारी मशीनरी ने वन क्षेत्रों के इर्दगिर्द कूड़ा निस्तारण को बेहतर बनाने के दावे किए थे। हालांकि, देहरादून की ताजा घटना उन दावों को चुनौती देती दिख रही है।

    देश और दुनिया में हाथियों की मौत का कारण बन रहा प्लास्टिक

    कुछ समय पहले तमिलनाडु (कोयंबटूर) में एक गर्भवती हाथी की मौत के बाद पोस्टमार्टम में उसके पेट से प्लास्टिक, पालीथिन कवर और एल्युमिनियम फायल पाए गए थे।

    श्रीलंका में प्लास्टिक कचरा निगलने से करीब 20 हाथियों की मौत सामने आ चुकी है। वहां हाथियों के पेट से भारी मात्रा में प्लास्टिक निकाला गया।

    यह भी पढ़ें- चढ़ते पारे से खतरे की आहट! ग्लेशियर झीलों पर सख्त निगरानी, वाडिया संस्थान नोडल

    यह भी पढ़ें- हिमालय में जलवायु परिवर्तन का असर, हर साल 6 मीटर सिकुंड रहा चोराबाड़ी ग्लेशियर, वाडिया और GBPNIHE के वैज्ञानिकों ने 20 साल तक की रिसर्च

    यह भी पढ़ें- Uttarakhand: वाडिया के अध्ययन ने पलटी पुरानी थ्योरी, जोशीमठ भूस्खलन के मलबे पर नहीं, ग्लेशियर मलबे पर बसा