Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    Chandra Grahan 2026: चंद्रग्रहण का क्या है समय? सूतककाल में बंद रहेंगे मंदिरों के कपाट

    Updated: Mon, 02 Mar 2026 10:08 PM (IST)

    फाल्गुन पूर्णिमा पर साल का पहला चंद्रग्रहण मंगलवार को लगेगा। सूतककाल के चलते देहरादून के सभी प्रमुख मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे। ...और पढ़ें

    Chandra Grahan 2026 फाल्गुन की पूर्णिमा तिथि पर मंगलवार को साल का पहला चंद्रग्रहण लगेगा।

    Chandra Grahan 2026 फाल्गुन की पूर्णिमा तिथि पर मंगलवार को साल का पहला चंद्रग्रहण लगेगा।

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    जागरण संवाददाता, देहरादून। Chandra Grahan 2026 फाल्गुन की पूर्णिमा तिथि पर साल का पहला चंद्रग्रहण मंगलवार को लगेगा। तीन घंटे 27 मिनट तक लगने वाला ग्रहण दोपहर तीन बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा।

    चंद्रग्रहण से नौ घंटे पहले यानी छह बजकर 20 मिनट से सूतककाल शुरू हो जाएगा। इस काल में मंदिरों के पट बंद रहेंगे। ग्रहण का मोक्ष शाम छह बजकर 47 मिनट पर होगा।

    इसके बाद शुद्धिकरण कर मंदिरों के पट खोल विधि-विधान से पूजा-अर्चना होगी।

     ये मंदिर रहेंगे बंद

    • देहरादून के सिद्धपीठ डाटकाली मंदिर
    • श्री टपकेश्वर महादेव मंदिर
    • श्री पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर सहारनपुर चौक
    • हनुमान मंदिर पटेलनगर
    • जंगम शिवालय पलटन बाजार
    • सनातन धर्म मंदिर प्रेमनगर
    • प्राचीन शिव मंदिर धर्मपुर
    • सनातन धर्म मंदिर नेहरू कालोनी 

    Blood Moon

    सूतककाल में यह रहता प्रतिबंध

    उत्तराखंड विद्वत सभा के अध्यक्ष आचार्य हर्षपति गोदियाल ने बताया कि सूतककाल के दौरान स्नान, पुण्य कार्य, व्रत, भगवान की मूर्ति का स्पर्श प्रतिबंध रहता है।

    • लोग घरों पर ही प्रभु का स्मरण और दान कर पुण्य कमा सकते हैं।

    सभा के प्रवक्ता विपिन डोभाल ने बताया कि मंदिरों में पूजा-आरती सुबह सूतककाल लगने से पूर्व कर दी जाएगी।

    सूतककाल कब है

    ज्योतिषाचार्य आचार्य डा. सुशांत राज के अनुसार ग्रहण का सूतककाल सुबह छह बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा।

    चंद्रग्रहण का समय

    ग्रहण का छाया प्रवेश दोपहर दो बजकर 14 मिनट पर, ग्रहण का स्पर्श दोपहर तीन बजकर 20 मिनट, ग्रहण का सम्मिलन शाम चार बजकर 35 मिनट, ग्रहण का मध्यकाल शाम पांच बजकर चार मिनट, जबकि ग्रहण का मोक्ष शाम छह बजकर 47 मिनट पर रहेगा।

    आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं के अनुसार ग्रहण में किसी भी तरह का आयोजन नहीं होता, इसलिए होलिका दहन के अगले दिन मनया जाने वाला रंगोत्सव इस बार ग्रहणवाले दिन छोड़कर बुधवार को मनाया जाएगा।