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उत्तराखंड में बच्चों के कफ सिरप पर शिकंजा, फैक्ट्री से मेडिकल स्टोर तक खंगाला जाएगा स्टॉक

Published: Fri, 28 Aug 2026 06:27 AM (IST)

सरकार ने चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कफ-कोल्ड की कुछ दवाओं (क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फिनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड ...और पढ़ें

यह फोटो एआई टूल की मदद से बनाई गई है।

यह फोटो एआई टूल की मदद से बनाई गई है।

HighLights

  1. चार साल से कम बच्चों की कफ-कोल्ड दवाएं प्रतिबंधित।

  2. क्लोरफेनिरामाइन मैलेट, फिनाइलएफ्रिन संयोजन वाली दवाएं शामिल।

  3. उत्तराखंड में उत्पादन, स्टॉक की जांच होगी, कार्रवाई तय।

राज्य ब्यूरो, देहरादून। चार साल से कम उम्र के बच्चों को दी जाने वाली कफ-कोल्ड की दवाओं को लेकर सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फिनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड के संयोजन वाली सभी फिक्स्ड डोज कांबिनेशन (एफडीसी) दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों में इनका इस्तेमाल नहीं करने की चेतावनी देना भी अनिवार्य किया गया है। केंद्र के फैसले के बाद उत्तराखंड में भी इन दवाओं की उपलब्धता और स्टाक की जांच की जाएगी। प्रदेश में हरिद्वार, सेलाकुई और रुड़की फार्मा उत्पादन क्षेत्र हैं।

ऐसे में स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने ड्रग कंट्रोल विभाग को यह पता लगाने के निर्देश दिए हैं कि संबंधित संयोजन वाली दवाओं का प्रदेश में कहीं उत्पादन तो नहीं हो रहा है, कंपनियों के पास कितना तैयार माल और कितना स्टाक थोक विक्रेताओं और मेडिकल स्टोर तक पहुंच चुका है।

प्रदेश में कंपनियों से उत्पादन और स्टाक का ब्योरा लेने के साथ ही मेडिकल स्टोरों पर भी जांच की जाएगी। उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

बच्चों के लिए क्यों जोखिम

क्लोरफेनिरामाइन मैलेट एक एंटीहिस्टामिन है, जिसका इस्तेमाल छींक, नाक बहने और एलर्जी जैसे लक्षणों को कम करने में होता है। फिनाइलएफ्रिन बंद नाक में राहत देने वाली दवा है। दोनों को मिलाकर तैयार दवाओं का इस्तेमाल सर्दी-जुकाम के लक्षणों में किया जाता है। चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों में इन दवाओं के इस्तेमाल को लेकर चिंता मुख्य रूप से उम्र के हिसाब से दवा के प्रभाव और जोखिम को लेकर है।

केंद्र के निर्देश के अनुसार उत्तराखंड में भी संबंधित दवाओं के स्टाक और बिक्री की निगरानी की जाएगी। दवा विक्रेताओं को निर्देशों का पालन करना होगा और उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। -विनय शंकर पांडेय, सचिव स्वास्थ्य।