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उत्तराखंड की नई सहकारी नीति को कैबिनेट की हरी झंडी, गांवों और युवाओं के लिए बेहद खास

Published: Wed, 26 Aug 2026 10:39 AM (IST)

उत्तराखंड कैबिनेट ने नई सहकारी नीति को मंजूरी दी है, जिसका लक्ष्य 2036 तक ग्रामीण विकास, उद्यमिता और रोजगार सृजन को बढ़ावा देना है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।

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राज्य ब्यूरो, देहरादून। राष्ट्रीय सहकारी नीति के अनुरूप उत्तराखंड की नई सहकारी नीति को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है। सहकार से समृद्धि के दृष्टिगत नीति में सहकारिता आधारित ग्रामीण विकास, उद्यमिता, रोजगार सृजन व आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया है।

वर्ष 2036 तक तीन चरणों में लागू होने वाली यह नीति सात रणनीतिक स्तंभों पर केंद्रित है। इनमें सहकारिता की बुनियाद को मजबूती, संस्थाओं की जीवंतता, भविष्य के लिए तैयारी, समावेशिता, नए क्षेत्रों में विस्तार, युवाओं को जोड़ना, आर्थिक व्यवहार्यता और विविधीकरण शामिल हैं।

पेक्स को बनाया जाएगा बहुद्देशीय ग्रामीण आर्थिक केंद्र 

गांव-गांव में सहकारिता को बढ़ावा देने के दृष्टिगत नीति के तहत पेक्स को बहुद्देशीय ग्रामीण आर्थिक केंद्र बनाया जाएगा। इनके माध्यम से कृषि, उद्यान, डेयरी, बागवानी, मत्स्य, भंडारण, कोल्ड-चेन, प्राथमिक प्रसंस्करण, कृषि यंत्र किराया, बीमा, पेंशन और डिजिटल बैंकिंग जैसी सेवाएं सहकारी नेटवर्क से जाेड़ी जाएंगी। साथ ही हिमालयी उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन के लिए क्लस्टर माडल को बढ़ावा मिलेगा।

महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने को महिला सहकारी समितियों, सहकारी स्टार्टअप, इंटर्नशिप, कौशल विकास और उद्यमिता को प्रोत्साहन पर जोर दिया गया है। पर्यटन, होमस्टे, ईको टूरिज्म, आयुष, सौर ऊर्जा, जैविक खेती, कार्बन क्रेडिट, वन उत्पाद, स्वास्थ्य, ड्रोन, एआई, हस्तशिल्प और परिवहन में भी सहकारी माडल विकसित होंगे। ''सहकार टैक्सी'' को बढ़ावा दिया जाएगा।

पलायन रोकथाम को वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम को सहकारिता से जोड़ा जाएगा। हब एंड स्पोक माडल से दुर्गम क्षेत्रों में सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी। साथ ही कागजरहित कार्यप्रणाली, रियल-टाइम लेखांकन, डिजिटल बैंकिंग, क्लाउड सीबीएस और डिजिटल डैशबोर्ड आधारित निगरानी को बढ़ावा मिलेगा। सहकारिता मंत्री डा. धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड अपने विशिष्ट ''हिमालयी सहकारिता माडल'' की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

अन्य विभागों में भेजे जाएंगे टीडीसी के 85 कार्मिक

उत्तराखंड बीज एवं तराई विकास निगम लि. (टीडीसी) में कार्यरत तृतीय श्रेणी के 22 व चतुर्थ श्रेणी के 63 कार्मिकों को नैनीताल व ऊधम सिंह नगर जिलों में अन्य विभागों में सेवा स्थानांतरण के आधार पर भेजा जा सकेगा। कैबिनेट ने कृषि विभाग के इस प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। इससे टीडीसी को प्रतिवर्ष हो रहे घाटे को रोकने में मदद मिलेगी।

असल में टीडीसी में इन कार्मिकों की उपयोगिता सीजनल होती है। अन्य विभागों में इन्हें अधिकतम 10 वर्ष अथवा सेवानिवृत्ति से तीन माह पहले तक के लिए भेजा जाएगा। इस अवधि में संबंधित विभाग ही उनका वेतन देंगे, लेकिन सेवानिवृत्ति लाभ टीडीसी ही देगा।

यूयूएसडीए के ढांचे में 94 अस्थायी पदों का सृजन

कोटद्वार, चंपावत, टनकपुर, किच्छा, पिथौरागढ़, रुद्रपुर, काशीपुर, सितागंज नगर निकायों में एडीबी, ईआईबी से वित्त पोषित पेयजल व सीवेज और ऋषिकेश में जर्मन बैंक केएफडब्लू से वित्त पोषित सड़क, सीवेज, स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक परिवहन, पेयजल, घाटों का सुंदरीकरण जैसे कार्यों में अब तेजी आएगी। कैबिनेट ने इनके सुचारू संचालन के लिए उत्तराखंड अर्बन सेक्टर डेवपलमेंट एजेंसी (यूयूएसडीए) में 94 स्थायी (निस्संवर्गीय) पदों के सृजन को मंजूरी दी है।

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