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    Uttarakhand Cabinet: ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2026 को धामी कैबिनेट की मंजूरी, इन फैसलों पर भी लगी मुहर

    Updated: Wed, 28 Jan 2026 01:24 PM (IST)

    उत्तराखंड कैबिनेट ने परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण को आसान बनाने हेतु महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। अब भूस्वामियों से आपसी समझौते के आधार पर भूमि खरीदी ...और पढ़ें

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। फाइल फोटो

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। फाइल फोटो

    HighLights

    1. परियोजनाओं के लिए आपसी समझौते से भूमि खरीद होगी

    2. ग्रीन हाइड्रोजन नीति को कैबिनेट ने दी हरी झंडी

    3. भूस्वामियों को सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा मिलेगा

    राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। उत्तराखंड में लघु, मध्यम व वृहद श्रेणी की जिन परियोजनाओं को राज्य सरकार स्वीकृति देगी, अब वे तेजी से धरातल पर उतरेंगी। राज्य में भूमि बैंक न होने के कारण परियोजनाओं के लिए जमीन की उपलब्धता आसान करने के उद्देश्य से कैबिनेट ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके तहत किसानों व भूस्वामियों से आपसी समझौते के आधार पर भूमि की खरीद हो सकेगी। इस पहल से जहां एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न परियोजनाएं तेजी से आकार लेंगी, वहीं औद्योगिक विकास को गति मिलने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बुधवार को सचिवालय में हुई कैबिनेट की बैठक में आठ प्रस्ताव रखे गए थे, जिन्हें चर्चा के बाद स्वीकृति दे दी गई। अपर सचिव मुख्यमंत्री, बंशीधर तिवारी ने मीडिया सेंटर में कैबिनेट में लिए गए निर्णयों की जानकारी साझा की।

    उन्होंने कहा कि भूमि अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम के तहत राज्य परियोजनाओं के लिए भूमि प्राप्त की जाती है। भूमि अधिग्रहण की इस प्रक्रिया में अत्यधिक समय लगता है। इसी को ध्यान में रखते हुए राजस्व विभाग ने नई प्रक्रिया के निर्धारण का प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष रखा था, जिसे स्वीकृति दे दी गई। इस प्रक्रिया के अंतर्गत आपसी समझौते के आधार पर भूस्वामियों से भूमि प्राप्त करने पर मुकदमेबाजी जैसे मामलों में कमी आएगी। साथ ही जनहित की परियोजनाओं की लागत भी कम हो सकेगी।

    भूमिहीन होने पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त राशि

    आपसी समझौते से भूमि प्राप्त करने की प्रक्रिया में प्रविधान किया गया है कि ग्रामीण क्षेत्र में सर्किल रेट का चार गुना अधिक दर दी जाएगी। मोल-भाव का विकल्प खुला रहेगा। यह भी प्रविधान किया गया है कि यदि भूमि देने के बाद कोई व्यक्ति भूमिहीन हो जाता है तो उसे भूमि की कुल लागत की 25 प्रतिशत राशि अतिरिक्त दी जाएगी। इसी तरह 50 प्रतिशत भूमि जाने पर 12 प्रतिशत अतिरिक्त राशि दी जाएगी।<br/><br/>मूल्य निर्धारण को दो कमेटियां

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    भूमि के मूल्य निर्धारण के लिए दो कमेटियां गठित होंगी। 10 करोड़ तक के प्रस्ताव की स्वीकृति एडीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी देगी, जबकि डीएम इसे अनुमोदित करेंगे। इसी प्रकार 10 करोड़ से अधिक के प्रस्ताव की स्वीकृति डीएम देंगे और अनुमोदन मंडलायुक्त करेंगे। विवाद की स्थिति में मंडलायुक्त के यहां अपील की जा सकेगी।

    यह होंगे लाभ

    • समय पर शुरू होंगी परियोजनाएं, लागत भी नहीं बढ़ेगी।
    • भूस्वामियों से सीधे बातचीत से उचित दर पर मुआवजे का रास्ता साफ।
    • सीधे भूमि क्रय करने की व्यवस्था से अधिग्रहण में लगने वाला समय बचेगा।
    • आपसी सहमति से हुए सौदों के चलते मुकदमेबाजी व कानूनी अड़चनें होगी दूर।
    • -पर्वतीय क्षेत्रों में उद्योगों के लिए उपलब्ध हो सकेगी भूमि, निवेश भी बढ़ेगा।
    • परियोजनाओं के आकार लेने से युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के अवसर।

    कैबिनेट के ये भी फैसले

    • राज्य में कृषि व पेयजल को छोड़कर भूजल के व्यावसायिक उपयोग पर देना होगा शुल्क, दरें तय।
    • हरित उत्पादन को बढ़ावा देने को ग्रीन हाइड्रोजन नीति लागू करने को हरी झंडी।
    • चिन्यालीसौड़ व गौचार हवाई पट्टियां नागरिक एवं सैन्य संचालन के उद्देश्य से रक्षा मंत्रालय को होंगी हस्तांतरित।
    • स्वास्थ्य कार्यकर्ता व पर्यवेक्षकों को पांच वर्ष की सेवा पर कार्यकाल में एक बार आपसी सहमति के आधार पर जिला परिवर्तन की अनुमति।
    • ऊधम सिंह नगर जिले में सिडकुल को हस्तांतरित प्राग फार्म की भूमि के पट्टेदार समान परियोजना के लिए इसे उप पट्टे पर दे सकेंगे।
    • देहरादून, चमोली, ऊधम सिंह नगर व पिथौरागढ़ में जिला जनजाति कल्याण अधिकारियों के पदों का प्रविधान सेवा नियमावली में करने को मंजूरी।
    • देहरादून में जीआरडी उत्तराखंड विश्वविद्यालय नाम से निजी विवि स्थापना को हरी झंडी।