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उत्तराखंड की नई सहकारिता नीति युवाओं के लिए खोलेगी रोजगार और उद्यमिता के द्वार, स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन

Updated: Sat, 29 Aug 2026 10:53 PM (IST)

उत्तराखंड की नई सहकारिता नीति युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता का बड़ा मंच बनेगी, जिसमें प्रशिक्षण से भर्ती तक ...और पढ़ें

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HighLights

  1. युवाओं के लिए प्रशिक्षण से भर्ती तक की व्यवस्था।

  2. सहकारी स्टार्टअप्स और उद्यमिता को मिलेगा प्रोत्साहन।

  3. सहकारिता को उच्च शिक्षा और कौशल विकास से जोड़ा जाएगा।

राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड में सहकारिता आंदोलन अब सिर्फ समितियों और पारंपरिक आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा। नई सहकारिता नीति में इसे युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता का बड़ा मंच बनाने की तैयारी है।

प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, स्टार्टअप और भर्ती को एक ही तंत्र से जोड़कर सहकारी क्षेत्र में युवाओं के लिए करियर के नए अवसर तैयार किए जाएंगे। नीति में सहकारी विकास के लिए युवा पीढ़ी को तैयार करने को प्रमुख मिशन के तौर पर शामिल किया गया है।

नीति के तहत युवा वर्ग को सहकारिता की ओर आकर्षित करने के लिए सहकारी करियर हेतु प्रेरणा कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसके माध्यम से युवाओं को सहकारी संस्थाओं में रोजगार और कारोबार की संभावनाओं की जानकारी दी जाएगी। साथ ही अल्पावधि के इंटर्नशिप कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे, जिससे विद्यार्थी और युवा सहकारी संस्थाओं के कामकाज को करीब से समझ सकेंगे।

नौकरी नहीं, उद्यमी बनाने पर जोर

सहकारी स्टार्टअप को प्रोत्साहन और उद्यमिता सहयोग देने की भी योजना है। इसका उद्देश्य युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला बनाने के बजाय रोजगार देने वाला उद्यमी तैयार करना है। खासतौर पर पहाड़ी जिलों में स्थानीय संसाधनों और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े स्वरोजगार के अवसर विकसित करने पर जोर रहेगा।

पाठ्यक्रम से जुड़ेगी सहकारिता

नई नीति में सहकारिता को उच्च शिक्षा और कौशल विकास से जोड़ने का प्रावधान है। मानकीकृत सहकारी पाठ्यक्रम, स्थानीय केस स्टडी और डिजिटल लर्निंग हब तैयार किए जाएंगे। इससे विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही सहकारी क्षेत्र, स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार की संभावनाओं की जानकारी मिल सकेगी।

जाब पोर्टल पर मिलेंगी भर्तियां

सहकारी क्षेत्र में भर्ती को पारदर्शी बनाने के लिए एकीकृत सहकारी जाब पोर्टल, स्वतंत्र चयन प्रक्रिया और करियर काउंसिलिंग केंद्र स्थापित करने की योजना है। विश्वविद्यालयों को भी सहकारी क्षेत्र से जोड़कर शोध, प्रशिक्षण और विशेषज्ञता विकसित की जाएगी। इससे सहकारिता में आधुनिक तकनीक और प्रबंधन को बढ़ावा मिलने के साथ युवाओं के लिए विशेषज्ञ स्तर के करियर विकल्प भी तैयार होंगे।

हर जिले में कौशल विकास केंद्र

सहकारिता मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत के अनुसार युवाओं की रोजगार जरूरतों के अनुरूप सहकारी कौशल विकास मिशन विकसित किया जाएगा। जिला स्तर पर कौशल विकास केंद्रों के माध्यम से स्थानीय आर्थिक गतिविधियों के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाएगा। महिला उद्यमिता को भी मिशन से जोड़ा जाएगा।