उत्तराखंड में मौसम की मार, अतिवृष्टि व ओलावृष्टि से 27.76 हेक्टेयर में खड़ी फसलें तबाह
उत्तराखंड के पांच जिलों में अप्रैल में अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से 3469.04 हेक्टेयर फसलें प्रभावित हुईं। हालांकि, आपदा राहत मानकों के तहत केवल 27.76 हेक ...और पढ़ें

फसलों को 33 प्रतिशत से अधिक की क्षति हुई है। फाइल फोटो

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड के पांच जिलों में इस माह खेती-किसानी पर मौसम की मार पड़ी है। इन जिलों में अतिवृष्टि व ओलावृष्टि से 3469.04 हेक्टेयर क्षेत्र में औद्यानिकी एवं कृषि फसलों को नुकसान पहुंचा।
अलबत्ता, आपदा राहत के तय मानकों में मात्र 27.76 हेक्टेयर क्षेत्र ही आ पाया है। इसमें फसलों को 33 प्रतिशत से अधिक की क्षति हुई है। उद्यान और कृषि विभाग की ओर से राज्य में कराए गए सर्वे में यह बात सामने आई है।
इस माह की शुरुआत से ही मौसम ने जो तेवर दिखाए, उसने किसानों, बागवानों के माथों पर चिंता की लकीरें ला दीं। वर्षा, अतिवृष्टि व ओलावृष्टि ने गर्मी के लिहाज से राहत तो दी, लेकिन खेती-किसानी को नुकसान पहुंचाया।
सर्वे की रिपोर्ट शासन को भेजी
कहीं, खेतों में खड़ी या काटकर रखी गई गेहूं की फसल खराब हो गई तो कहीं फूलों से लकदक सेब, नाशपाती के पेड़ वीरान से हो गए। सब्जियों को भी नुकसान पहुंचा। इसे देखते हुए कृषि और उद्यान विभाग की ओर से सभी जिलों में कराए गए सर्वे की रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक पांच जिलों औद्यानिकी-कृषि को काफी नुकसान पहुंचा, लेकिन आपदा से क्षतिपूर्ति के मानकों में काफी कम क्षेत्रफल ही आ रहा है। ऐसे में कुछ ही किसानों को क्षतिपूर्ति मिल पाएगी।
जिलेवार प्रभावित कृषि-बागवानी
- जिला, क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)
- उत्तरकाशी, 2700
- नैनीताल, 586.14
- टिहरी, 180
- चंपावत, 2.9
- 33 प्रतिशत से अधिक क्षति
बागवानी
- जिला, क्षेत्रफल
- नैनीताल, 15.14
- चंपावत, 2.9
कृषि
- टिहरी, 5.6
- ऊधम सिंह नगर, 4.12
ये फसलें हुई प्रभावित
- औद्यानिकी :- सेब, नाशपाती, प्लम, आडू़, टमाटर, लहसुन, प्याज, आलू, फ्रेंचबीन व मटर
- कृषि:- गेहूं, जौ