नई शिक्षा नीति के बूते उत्तराखंड की लंबी छलांग की तैयारी, 32% से 92% तक पहुंचा हाईस्कूल पास रेट
उत्तराखंड शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, जिसमें नई शिक्षा नीति (एनईपी-2020) बड़े बदलाव लाने की उम्मीद है।


समय कम है?
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राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड राज्य ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियों प्राप्त की हैं। अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) ने राज्य के लिए नई उम्मीदें जगाई हैं। नई शिक्षा नीति के प्रविधानों का सही ढंग से क्रियान्वयन हो तो राज्य की शिक्षा में बड़े बदलाव आएंगे। शिक्षा गुणवत्ता के दम पर युवाओं को रोजगार के अवसर सृजित होंगे और राष्ट्रीय रैंकिंग में राज्य लंबी छलांग लगा सकेगा।
राज्य गठन के समय सीमित संसाधन, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां, विद्यालयों तक पहुंच की समस्या और ड्राप आउट जैसी चुनौतियां का राज्य ने सामना किया। आज राज्य सरकार और केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयासों से शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार हुआ है। स्कूल शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में राज्य ने नये सोपान स्थापित किए हैं।
राज्य के दुर्गम इलाकों तक स्कूली शिक्षा पहुंचाने के लिए नये विद्यालय खोले गए और शिक्षकों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया। इससे विद्यार्थियों का नामांकन अनुपात बढ़ा एवं परीक्षा परिणामों में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ। आज उत्तराखंड शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है और देश के लिए एक माडल राज्य के रूप में उभरा है।
6322 विद्यालयों में डिजिटल लर्निंग सुविधा
राज्य के 6322 विद्यालयों में डिजिटल लर्निंग सुविधा उपलब्ध है। जिसमें स्मार्ट क्लासेस 4629, वर्चुअल माध्यम से 1340 एवं आइसीटी से 363 विद्यालयों में कक्षा कक्ष से शिक्षण कार्य का सीधा प्रसारण किया जा रहा है। यह यू-ट्यूब पर भी उपलब्ध है ताकि छात्र अवकाश के दिन घर से भी इसका लाभ ले सकें। राज्य में वर्चुअल प्रसारण के लिए छह स्टूडियो स्थापित किए गए हैं।
महाविद्यालय अत्याधुनिक शिक्षा से जुड़े
राज्य के सरकारी और निजी महाविद्यालयों एवं तकनीकी संस्थानों में में मशीन लर्निंग, डेटा ऐनालिसिस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन टेक्नोलाजी, क्लाउड कंप्यूटिंग से अत्याधुनिक पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं। राज्य के 425 महाविद्यालयों में 4.72 लाख विद्यार्थी पारंपरिक और तकनीकी उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
बजट 665 करोड़ से बढ़ाकर 12,401 करोड़ किया
राज्य गठन के समय स्कूल शिक्षा का बजट मात्र 665 करोड़ था, जो आज बढ़कर 12,401 करोड़ पहुंच गया है। इस अवधि में प्रारंभिक शिक्षा का बजट 342 करोड़ रुपये से बढ़कर 4384 करोड़ और माध्यमिक शिक्षा का बजट 423 करोड़ से बढ़कर 7017 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
हाईस्कूल बोर्ड में उत्तीर्ण दर 32 से 92 प्रतिशत पहुंची
राज्य गठन के समय हाईस्कूल परीक्षा में विद्यार्थियों का उत्तीर्ण प्रतिशत मात्र 32.6 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 92.10 प्रतिशत हो गया है। यह सफलता विद्यालयों की बेहतर पहुंच, जनजागरूकता, संसाधनों की उपलब्धता और शिक्षकों के निरंतर प्रशिक्षण का परिणाम है। राज्य के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर पर भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर उत्तराखंड को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाया है।
शिक्षा को अध्यात्म से जोड़कर ''ज्ञानपथ'' तैयार किया
उत्तराखंड राज्य ने शिक्षा को आध्यात्मिकता से जोड़कर देश की पुरातन शिक्षा पद्धति को पुनर्जीवित करने की दिशा में उल्लेखनीय कदम उठाया है। इस पहल से न केवल भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनः आरंभ करने का गौरव प्राप्त हुआ है, बल्कि राज्य ने आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में भी गुणात्मक सुधार किया है। दून विश्वविद्यालय का हिंदी अध्ययन केंद्र इसका उदाहरण है।
शिक्षा के क्षेत्र में ये हैं चुनौतियां
- गुणवत्ता शिक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा, ताकि सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या कम न हो।
- सरकारी विद्यालयों में बुनियादी संसाधनों को शत प्रतिशत उपलब्ध करना।
- सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को समय पर भरना होगा।
- पर्वतीय जनपदों की शिक्षा व्यवस्था को हाइटेक बनाना, ताकि शिक्षा के लिए पलायन थम सके।
‘उत्तराखंड में शिक्षा में बड़ा बदलाव एनईपी-2020 के तहत किया जा रहा है। जल्द ही इसके परिणाम भी दिखाई देंगे। राज्य गठन के बाद से 26 वर्षों में शिक्षा ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।’ - डा. धन सिंह रावत, शिक्षा मंत्री
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