सरस्वती ताल और केदार ताल की अब सामने आएगी तस्वीर, देहरादून से रवाना हुआ विशेषज्ञ दल
उत्तराखंड में सरस्वती ताल और केदार ताल ग्लेशियर झीलों के संभावित आपदा जोखिम का आकलन करने के लिए एक विशेषज्ञ दल देहरादून से रवाना हुआ है।

इन दोनों ग्लेशियर झीलों के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के लिए आठ संस्थानों के विशेषज्ञों का दल रवाना। प्रतीकात्मक

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, देहरादून। ग्लेशियर झीलों से संभावित आपदा के खतरे का आकलन करने को उत्तराखंड में वैज्ञानिक सर्वेक्षण अभियान तेज कर दिया गया है।
इसी क्रम में चमोली जिले के सरस्वती ताल और उत्तरकाशी के केदार ताल का बाथीमेट्री सर्वेक्षण करने के लिए आठ संस्थानों के विशेषज्ञ दल मंगलवार को देहरादून से रवाना हुआ। विशषज्ञ दल इन दोनों ग्लेशियर झीलों की स्थिति, जलस्तर, संरचना और संभावित जोखिमों का अध्ययन कर डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करेगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के क्रम में प्रदेश की संवेदनशील झीलों के व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन कराया जा रहा है। इस कड़ी में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) मुख्यालय से सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने विशेषज्ञ दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना गया।
यह सर्वेक्षण जोखिम न्यूनीकरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण
सचिव सुमन ने सरस्वती ताल करीब 5700 मीटर और केदार ताल करीब 4750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं। अत्यधिक ऊंचाई और दुर्गम परिस्थितियों में होने वाला यह सर्वेक्षण जोखिम न्यूनीकरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
यह भी पढ़ें- ग्लेशियर झीलें उत्तराखंड में आपदा की नई चुनौती, 344 में से 13 बेहद जोखिमपूर्ण
सर्वेक्षण दल में यूएसडीएमए, उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र (यूएलएमएमसी), बाबा साहेब पुराविज्ञान संस्थान लखनऊ, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के विशेषज्ञ शामिल हैं।
दल में रोहित कुमार, निखिल पुनिया, डा. विशाल, दीपक भट्ट, डा. शेख नवाज अली, शुभजीत घोष, प्रकाश रंजन जेना, डा. पिंकी बिष्ट, स्वप्निल बिष्ट, शिव्यांक सिंह नेगी, शिव शंकर यादव, डा. शिवानंद मंडराहा, नितेश खेतवाल, संदीप सिंह, सचिन कुमार, मनीष कुमार, महेंद्र, मनोज सिंह, शार्दुल गुसाईं और इंजीनियर नरेंद्र सिंह रावत हैं।
यह भी पढ़ें- उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों के जोखिम आकलन के लिए विशेषज्ञ दल रवाना
प्रदेश की संवेदनशील ग्लेशियर झीलों का व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन कराया जा रहा है। इसके तहत झीलों के जलस्तर, आकार में बदलाव, आसपास के भू-भाग और संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों का आकलन किया जाएगा। संभावित खतरे की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों तक समय पर चेतावनी पहुंचाना महत्वपूर्ण है। इसके लिए आधुनिक सेंसर, जलस्तर मापक उपकरण और संचार प्रणाली जैसे तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। - पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड
