उत्तराखंड में ट्रांसफर से बाहर हुए सैकड़ों अतिथि शिक्षक, कई प्रवक्ताओं ने ली जगह
उत्तराखंड में स्थायी शिक्षकों के तबादलों के बाद सैकड़ों अतिथि शिक्षकों की सेवाएं समाप्त हो गई हैं, जिससे 12-15 साल ...और पढ़ें

यह फोटो एआई टूल की मदद से बनाई गई है।
HighLights
स्थायी शिक्षकों के तबादलों से सैकड़ों अतिथि शिक्षकों की सेवाएं समाप्त हुईं।
12-15 वर्षों से दुर्गम क्षेत्रों में सेवा दे रहे थे अतिथि शिक्षक।
शिक्षा मंत्री ने रिक्त पदों पर प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया।
राज्य ब्यूरो, देहरादून। शिक्षा मंत्री के आश्वासन के बावजूद स्थायी प्रवक्ता और एलटी शिक्षकों के तबादले पर जाने से सैकड़ों अतिथि शिक्षकों की सेवाएं समाप्त हो गई हैं। विडंबना यह है कि अतिथि शिक्षकों का कोई आधिकारिक रिकार्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण सेवा समाप्त होने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति की सुध लेने वाला भी कोई नहीं है।
अतिथि शिक्षक पिछले 12 से 15 वर्षों से निर्धारित मानदेय पर दुर्गम और अति दुर्गम क्षेत्रों के राजकीय विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं। अब उनके विद्यालयों में अनुरोध आधार पर हुए तबादलों से स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति होने के बाद उन्हें सेवा से हटाया जा रहा है।
करीब सौ से अधिक प्रवक्ताओं और 200 से अधिक एलटी शिक्षकों के स्थानांतरण के बाद बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षकों की सेवाएं समाप्त हुई हैं। कई क्षेत्रों में अतिथि शिक्षकों के जाने से अभिभावक भी आहत हैं।
वहीं, वर्षों से विद्यार्थियों को पढ़ा रहे शिक्षकों के विद्यालय से जाने पर छात्र भी भावुक हैं। इंटरनेट मीडिया पर विद्यार्थी अपने शिक्षकों की लगन से की गई मेहनत को साझा कर रहे हैं। अतिथि शिक्षक संघ के पूर्व अध्यक्ष अभिषेक भट्ट का कहना है कि लंबे समय तक सेवाएं देने के बावजूद उन्हें स्थायी व्यवस्था का लाभ नहीं मिल रहा है।
पद सृजित करने को निदेशालय में दे चुके धरना
राजकीय विद्यालयों में लंबे समय से एलटी और प्रवक्ता के रूप में सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों ने पद सृजित करने और सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर वर्ष 2024 में शिक्षा निदेशालय, ननूरखेड़ा में 40 दिन से अधिक समय तक क्रमिक धरना दिया था। उधर, शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि जिस विद्यालय में पद रिक्त हैं वहां अतिथि शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाएगी। किसी की सेवा समाप्त नहीं की जाएगी।
