उत्तराखंड बनेगा आयुष का वैश्विक केंद्र, हर्बल खेती और वेलनेस टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा
उत्तराखंड सरकार राज्य को आयुष का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना पर काम कर रही है, जिसमें औषधीय ...और पढ़ें

HighLights
औषधीय पौधों की वैज्ञानिक खेती और ड्रोन तकनीक का उपयोग।
आयुष विनिर्माण, वेलनेस टूरिज्म और अनुसंधान को प्रोत्साहन।
किसानों और उद्यमियों को आर्थिक लाभ, वैश्विक पहचान।
डिजिटल टीम, देहरादून। उत्तराखंड अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक संसाधनों और दुर्लभ औषधीय जड़ी-बूटियों के बल पर देश-विदेश में पारंपरिक चिकित्सा और आयुष के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई में राज्य सरकार उत्तराखंड को आयुष का वैश्विक हब बनाने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना पर काम कर रही है। इसमें औषधीय पौधों की वैज्ञानिक खेती, आयुष विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, वेलनेस टूरिज्म और अनुसंधान पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
वैज्ञानिक खेती और ड्रोन तकनीक: बेहतर खेती और फसलों की निगरानी के लिए अच्छी कृषि पद्धतियों (GAP), गुणवत्ता मानकों और ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
कोल्ड स्टोरेज व बाजार व्यवस्था: उत्पादों को एक जगह एकत्र करने के लिए कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। किसानों को बाजार का भरोसा देने के लिए बाय-बैक (Buy-back) खरीद व्यवस्था शुरू की गई है, जिससे औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों को प्रोत्साहन मिल रहा है।
ब्रांडिंग: प्रमुख औषधीय उत्पादों के लिए 'उत्तराखंड/हिमालय' ब्रांड विकसित किया जा रहा है।
वित्तीय सहायता और क्लस्टर विकास: पात्र आयुष विनिर्माण इकाइयों को अतिरिक्त पूंजीगत सब्सिडी दी जा रही है। साथ ही क्लस्टर आधारित उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानक: WHO-GMP, AYUSH Premium और AYUSH Standard जैसे गुणवत्ता प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए इकाइयों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
जांच प्रयोगशालाएं: राज्य में साझा टेस्टिंग लैब और विशेष होम्योपैथिक दवा परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड को देश के प्रमुख आयुष विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करना है।
NABH मान्यता और बीमा: आयुष अस्पतालों और क्लिनिकों को NABH मान्यता दिलाने के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है, जिससे राज्य की स्वास्थ्य योजनाओं में उनका आसान पंजीकरण हो सके।
डिजिटल हेल्थ: सरकारी आयुष अस्पतालों को मजबूत करने के साथ-साथ टेली-कंसल्टेशन और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। बीमारियों से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली के लिए योग और आयुष ग्राम विकसित किए जा रहे हैं।
वेलनेस डेस्टिनेशन: पहाड़ी क्षेत्रों में पात्र वेलनेस सेंटर, होटल और रिसॉर्ट के लिए अतिरिक्त पूंजीगत प्रोत्साहन दिया जा रहा है। पीपीपी (PPP) और निजी निवेश के जरिए आयुष पार्क, योग व ध्यान केंद्र विकसित किए जा रहे हैं।
वैश्विक प्रचार: उत्तराखंड को दुनिया के प्रमुख वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने के लिए देश-विदेश में व्यापक प्रचार अभियान चलाए जा रहे हैं।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: आयुष कॉलेजों को NAAC मान्यता दिलाने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर बल दिया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग: देश-विदेश के प्रमुख संस्थानों के साथ मिलकर ओरिएंटेशन, इंटर्नशिप और रिसर्च प्रोग्राम शुरू किए जा रहे हैं।
पारंपरिक ज्ञान का प्रलेखीकरण: योग, प्राकृतिक चिकित्सा और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय पर शोध को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही उत्तराखंड की पारंपरिक आयुष ज्ञान परंपरा के दस्तावेजीकरण (Documentation) को मजबूत किया जा रहा है।
उत्तराखंड सरकार के इन एकीकृत प्रयासों से न केवल राज्य के किसानों और युवा उद्यमियों को आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि देवभूमि आयुष और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में पूरी दुनिया का मार्गदर्शन करेगी।
