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उत्तराखंड में 3638 करोड़ से मजबूत होगा बिजली नेटवर्क, केंद्र सरकार की स्क्रीनिंग कमेटी ने दी मंजूरी

By Jagran NewsEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Sat, 10 Oct 2026 01:16 AM (GMT+05:30)Updated: Sat, 10 Oct 2026 01:59 AM (GMT+05:30)

उत्तराखंड में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ₹3,638 करोड़ की परियोजना को केंद्र की स्क्रीनिंग समिति ने ADB ऋण के लिए मंजूरी दी है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. ₹3,638 करोड़ की परियोजना को केंद्र की मंजूरी।

  2. ADB से ₹2,182 करोड़ का ऋण प्रस्तावित।

  3. उत्तराखंड में 10 नए बिजलीघर स्थापित होंगे।

राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने और पारेषण व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन आफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) की 3,638 करोड़ रुपये की परियोजना को एशियाई विकास बैंक (एडीबी) से ऋण वित्तपोषण के लिए आगे बढ़ाने की केंद्र सरकार की स्क्रीनिंग समिति ने मंजूरी दे दी है।

परियोजना के तहत प्रदेश में 10 नए बिजलीघर स्थापित करने के साथ पारेषण लाइनों का निर्माण किया जाएगा। इससे बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ने और जलवायु संबंधी चुनौतियों के बीच विद्युत ढांचे को अधिक मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग की शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित 167वीं स्क्रीनिंग समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों और केंद्र सरकार के साथ समन्वय को इस उपलब्धि का महत्वपूर्ण आधार बताया गया है। प्रमुख सचिव ऊर्जा आर. मीनाक्षी सुंदरम ने समिति के समक्ष परियोजना का प्रस्तुतीकरण किया।

दो हजार करोड़ से अधिक का होगा एडीबी ऋण

‘उत्तराखंड क्लाइमेट रेजिलिएंट इंट्रा-स्टेट पावर ट्रांसमिशन सिस्टम डेवलपमेंट प्रोजेक्ट’ के तहत कुल 425 मिलियन अमेरिकी डालर यानी लगभग 3,638 करोड़ रुपये खर्च किए जाने प्रस्तावित हैं। इसमें 255 मिलियन अमेरिकी डालर यानी करीब 2,182 करोड़ रुपये एडीबी ऋण के रूप में प्रस्तावित हैं।

यह परियोजना की कुल लागत का 60 प्रतिशत है। शेष 40 प्रतिशत राशि पिटकुल और राज्य सरकार के अंशदान से जुटाई जाएगी। इसकी व्यवस्था दोनों पक्षों की पारस्परिक सहमति के अनुसार की जाएगी।

400 केवी के तीन बिजलीघर भी बनेंगे

परियोजना के तहत अलग-अलग क्षमता के 10 विद्युत उपकेंद्र स्थापित किए जाएंगे। इनमें 400 केवी के तीन, 220 केवी के तीन, 132 केवी के तीन और 66 केवी का एक बिजलीघर शामिल है। इनके साथ विभिन्न क्षमता की पारेषण लाइनें बिछाने, संबंधित सिविल कार्यों और परामर्श सेवाओं पर भी काम किया जाएगा।

इन उपकेंद्रों और पारेषण लाइनों के विकसित होने से प्रदेश के विद्युत नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी। साथ ही, बढ़ती बिजली मांग के अनुरूप पारेषण व्यवस्था को तैयार करने और आपूर्ति तंत्र की मजबूती में मदद मिलेगी।

अभी अंतिम ऋण मंजूरी बाकी

स्क्रीनिंग समिति की मंजूरी के बाद परियोजना को एडीबी के समक्ष ऋण वित्तपोषण की प्रक्रिया के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद बैंक की ओर से विस्तृत जांच और मूल्यांकन (ड्यू डिलिजेंस) किया जाएगा। इसी प्रक्रिया के आधार पर ऋण की अंतिम स्वीकृति संबंधी कार्रवाई आगे बढ़ेगी। यानी फिलहाल परियोजना को एडीबी ऋण के लिए आगे बढ़ाने की मंजूरी मिली है, ऋण की अंतिम स्वीकृति अभी शेष है।