25 जुलाई से चातुर्मास शुरू: मांगलिक कार्यों पर लगेगा ब्रेक, नवंबर से फिर बजेंगी शहनाइयां
देवशयनी एकादशी से 25 जुलाई को चातुर्मास शुरू होने के साथ ही विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। ...और पढ़ें

देवशयनी दकादशी।
HighLights
25 जुलाई से देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास प्रारंभ
विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य रुकेंगे
नवंबर 2026 से फिर शुरू होंगे शुभ विवाह मुहूर्त
जागरण संवाददाता, हरिद्वार। आगामी 25 जुलाई को देवशयनी (हरिशयनी) एकादशी के साथ चातुर्मास शुरू होते ही मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा।
ऐसे में विवाह, उपनयन, मुंडन और गृह प्रवेश की योजना बना रहे लोगों को अब कई महीनों तक शुभ मुहूर्त का इंतजार करना होगा।
इसका सीधा असर होटल, धर्मशालाओं, बैंक्वेट हाल, टेंट, कैटरिंग, फूल कारोबार और पुरोहितों की बुकिंग पर भी पड़ेगा।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने के साथ ही चातुर्मास प्रारंभ होता है। इस अवधि में सनातन परंपरा के अनुसार विवाह, उपनयन, मुंडन, गृह प्रवेश, प्राण-प्रतिष्ठा और अन्य मांगलिक संस्कार नहीं किए जाते।
इस वर्ष अधिकमास और ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण शुभ मुहूर्त अपेक्षाकृत कम हैं। उत्तराखंड के पहाड़ों में श्रावण संक्रांति से ही मांगलिक कार्य थम जाते हैं।
ज्योतिषाचार्य पं. सुरेश शास्त्री भट्ट का कहना है कि अब उपनयन संस्कार के लिए फरवरी 2027 तक प्रतीक्षा करनी होगी। वहीं, विवाह और मुंडन के शुभ मुहूर्त नवंबर 2026 से शुरू होंगे। भले ही नवंबर 2026 से जुलाई 2027 के बीच विवाह के 63 शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे।
धर्मनगरी हरिद्वार में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु विवाह, जनेऊ संस्कार और अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराने आते हैं। मांगलिक कार्यों पर विराम लगने से विवाह से संबंधित व्यवसाय से जुड़े कारोबारियों की गतिविधियां भी कुछ समय के लिए धीमी पड़ जाएंगी।
हालांकि इस दौरान हरिद्वार में कथा, भागवत, रुद्राभिषेक, जप-तप और धार्मिक आयोजनों की रौनक बढ़ जाएगी। चातुर्मास के शुरुआत में कांवड़ यात्रा से रौनक बढ़ेगी। जिसके बाद 15 सितंबर से चारधाम यात्रा अपनी रफ्तार पकड़ेगी।
21 नवंबर को हरिप्रबोधिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागरण के साथ ही विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों का शुभारंभ होगा।
देवशयनी एकादशी से चातुर्मास प्रारंभ होने पर मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। श्रद्धालुओं को विवाह, उपनयन और अन्य संस्कारों के लिए निर्धारित शुभ मुहूर्त का ही चयन करना चाहिए। चातुर्मास में कथा, भागवत, रुद्राभिषेक, जप-तप धार्मिक कार्य करने चाहिए।
-पं. मनोज त्रिपाठी, ज्योतिषाचार्य, हरिद्वार
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