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    माचिस की तीली बन रही बच्चों के कान की दुश्मन, डाक्टर बोले- पर्दा फटने तक की आ जाती नौबत

    Updated: Thu, 18 Dec 2025 07:50 PM (GMT+05:30)

    अभिभावकों द्वारा बच्चों के कान की सफाई के लिए माचिस की तीली का उपयोग करने से बच्चों के कान में जख्म और पर्दे फटने की समस्या हो रही है। सिविल अस्पताल क ...और पढ़ें

    सिविल अस्पताल में मरीजों से जानकारी लेते ईएनटी डा.अनुभव अग्रवाल। जागरण

    सिविल अस्पताल में मरीजों से जानकारी लेते ईएनटी डा.अनुभव अग्रवाल। जागरण 

    HighLights

    1. माचिस की तीली से सफाई करने से जख्म होने के साथ आ रहा मवाद

    2. प्रतिदिन पांच से सात ऐसे ही बच्चे ईएनटी की ओपीडी में करा रहे उपचार

    राजन गर्ग, जागरण, रुड़की : अक्सर अभिभावक बच्चों की कान की सफाई के लिए माचिस की तीली का सहारा लेते हैं। इससे बच्चों के कान में जख्म होने के साथ ही पर्दा फटने तक की नौबत आ जाती है।

    अभिभावकों की लापरवाही बच्चों के कान के लिए नुकसानदायक साबित हो रही है। सिविल अस्पताल के ईएनटी की ओपीडी में प्रतिदिन पांच से सात बच्चे ऐसे ही उपचार के लिए आ रहे हैं।

    आमतौर पर लोग कान की गंदगी साफ करने के लिए माचिस की तीली आदि का प्रयोग करते हैं। कभी लोग बिना विशेषज्ञों से ही कान की सफाई कराते हैं। इससे कान को गंभीर नुकसान होने की संभावना बनी रहती है। अभिभावक भी बच्चों की कान की सफाई माचिस की तीली आदि से करते हैं।

    इससे बच्चों के कान में जख्म होने के साथ ही कान से मवाद भी आ रहा है। सिविल अस्पताल के ईएनटी की ओपीडी में प्रतिदिन पांच से सात छोटे बच्चे अभिभावकों के साथ उपचार के लिए आ रहे हैं।

    चिकित्सक ने जब इनके अभिभावकों से जानकारी कि तो पता चला कि उन्होंने माचिस की तीली से बच्चों के कानों की सफाई की थी। इस वजह से उनके कानों में जख्म हो गया है। गुरुवार को भी अभिभावक अपने बच्चों को उपचार के लिए लेकर पहुंचे।

    यहां ईएनटी डा. अनुभव अग्रवाल ने उन्हें बताया कि बच्चों की कान की सफाई खुद से नहीं करनी चाहिए। माचिस की तीली के प्रयोग से कान का पर्दा फटने तक की नौबत भी आ जाती है।

    उन्होंने बताया कि इस मामले में लापरवाही बच्चों के कान को नुकसान पहुंचा सकती है। उन्होंने बताया कि इस मौसम में अभिभावकों को बच्चों का ध्यान भी रखना चाहिए। गले में दर्द से पीड़ित बच्चे भी उपचार के लिए आ रहे हैं।

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