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हरिद्वार में रेडियो कॉलरिंग के दौरान बिगड़ी हाथी की तबीयत, उपचार के दौरान मौत

Published: Sat, 07 Nov 2026 11:12 AM (IST)Updated: Sat, 07 Nov 2026 11:34 AM (IST)

हरिद्वार में रेडियो कॉलरिंग के दौरान एक 55 वर्षीय वृद्ध हाथी की तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। पोस्टमार्टम में ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, हरिद्वार। आबादी के नजदीक लगातार विचरण कर रहे करीब 55 वर्षीय वृद्ध हाथी की रेडियो कॉलरिंग की प्रक्रिया के दौरान तबीयत बिगड़ गई।

वन विभाग, वन्यजीव विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की संयुक्त टीम ने हाथी को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम में हाथी के हृदय में गंभीर विकार पाए गए हैं। अत्यधिक उम्र के कारण उसका शरीर बेहोशी की दवा के बाद उत्पन्न शारीरिक तनाव को सहन नहीं कर सका।

वन विभाग के अनुसार, हरिद्वार वन प्रभाग में हाथियों की नियमित निगरानी के दौरान एक वृद्ध हाथी की गतिविधियां हरिद्वार नगर और आसपास की आबादी के बेहद करीब पाई गई थीं। यह हाथी अक्सर आबादी वाले क्षेत्रों और कृषि भूमि में विचरण करता था। कई बार वह हरिद्वार नगर की ओर भी पहुंच जाता था। मानव-हाथी संघर्ष की आशंका और अर्धकुंभ मेला-2027 के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए रेडियो कॉलरिंग के लिए उसे चिह्नित किया गया था।

हाथी को बेहोश करने के लिए दवा का इंजेक्शन दिया

शुक्रवार (6 नवंबर) को भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के वरिष्ठ वैज्ञानिकों, विश्व प्रकृति निधि (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के विशेषज्ञों, अनुभवी वन्यजीव पशु चिकित्सकों और वन विभाग की संयुक्त टीम ने विशेषज्ञों की देखरेख में हाथी को बेहोश करने के लिए दवा का इंजेक्शन दिया।

इसके बाद अचानक उसकी स्थिति बिगड़ गई। टीम ने तत्काल ऑक्सीजन, सीपीआर, निर्धारित दवाओं और नसों के माध्यम से तरल पदार्थ देकर उपचार शुरू किया। बेहोशी की दवा का असर समाप्त करने के लिए भी निर्धारित दवा दी गई, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद हाथी को नहीं बचाया जा सका।

घटना के बाद स्वतंत्र पशु चिकित्सक विशेषज्ञ समिति ने हाथी का पोस्टमार्टम किया। इसमें उसकी उम्र करीब 55 वर्ष आंकी गई। जांच में हृदय की मांसपेशियों में रेशेदार बदलाव (मायोकार्डियल फाइब्रोसिस) और हृदय की कार्यक्षमता प्रभावित करने वाले विकार (कार्डियोमायोपैथी) पाए गए।

विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक वृद्धावस्था से जुड़े इन विकारों के चलते हाथी बेहोश करने की प्रक्रिया के दौरान पैदा हुए शारीरिक तनाव को सहन नहीं कर सका।

वन विभाग ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि हाथी को बचाने के लिए वन विभाग, डब्ल्यूआईआई, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और अनुभवी पशु चिकित्सकों की संयुक्त टीम ने हरसंभव प्रयास किए।

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