चंद्रग्रहण के बीच होली, सही समय और रंगों का प्रयोग जरूरी... ज्योतिष ने दूर किया संशय
आचार्य डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने होली 2026 की तिथियों पर संशय दूर किया है। 3 मार्च को चंद्रग्रहण के कारण होलिका दहन भद्रा समाप्ति के बाद सुबह 5:30 ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर।
HighLights
होलिका दहन 3 मार्च को, चंद्रग्रहण के कारण विशेष समय
धूलंडी का पर्व 4 मार्च को फाल्गुन प्रतिपदा में मनेगा
ग्रहण के दौरान सद्भाव से होली मनाने की सलाह
जागरण संवाददाता, हरिद्वार। इस बार होली के त्योहार पर बहुत असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
इस संशय को समाप्त करते हुए उत्तराखंड ज्योतिष रत्न आचार्य डा. चंडी प्रसाद घिल्डियाल दैवज्ञ ने बताया कि तीन मार्च को चंद्रग्रहण होने की वजह से धूलंडी अथवा छरोली चार मार्च को फाल्गुन प्रतिपदा में मनाना शास्त्र सम्मत रहेगा।
जबकि तीन मार्च को सुबह साढ़े पांच बजे पर भद्रा की समाप्ति के बाद 6:20 बजे तक होलिका दहन होगा।
डा. चंडी प्रसाद घिल्डियाल दैवज्ञ ने कहा कि शास्त्रों के अनुसार फाल्गुन मास पूर्णिमा तिथि को प्रदोष काल में भद्रा रहित समय पर होलिका दहन का विधान है।
परंतु इस बार फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तिथि दो मार्च 2026 को प्रदोष काल में व्याप्त है, जो 3 मार्च को सायंकाल 5:12 पर सूर्यास्त से पूर्व ही समाप्त हो रही है।
इसलिए भद्रा के पुच्छ काल में रात्रि को 1:27 से 2:39 तक होलिका दहन हो सकता है, अथवा 3 मार्च को सुबह 5:30 पर भद्रा की समाप्ति के बाद 6:20 तक होलिका दहन करना पूरे समाज के हित में शास्त्र सम्मत रहेगा।
वह इसलिए कि सूर्योदय 6:44 पर होगा, और चंद्र ग्रहण का सूतक काल भी 6:20 के बाद शुरू होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि यह स्थिति भी कहीं-कहीं पर अनुकूल न हो तो 3 मार्च को उदय व्यापिनी पूर्णमासी है इसलिए सायं काल 7:00 बजे ग्रहण की समाप्ति के बाद 8:30 बजे तक देशकाल परिस्थिति के अनुसार भी होलिका दहन कर सकते हैं।
चंद्र ग्रहण पर स्थिति स्पष्ट करते हुए डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने कहा कि पूर्णमासी का व्रत रखने वालों को 2 मार्च को व्रत रखना है, भारत में दृश्य होने वाले इस खग्रास ग्रस्तोदय चंद्र ग्रहण का सूतक 3 मार्च को सुबह 6:20 से शुरू हो जाएगा और भारतीय समयानुसार यह दोपहर 3:27 से 6:56 तक दिखाई देगा।
उन्होंने बताया कि यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में घटित होगा। 3 मार्च को चंद्रग्रहण होने की वजह से धूलंडी अथवा छरोली 4 मार्च को फाल्गुन प्रतिपदा में मनाना शास्त्र सम्मत रहेगा।
आचार्य डा. चंडी प्रसाद घिल्डियाल दैवज्ञ ने कहा कि होली पर ग्रहण का साया है, और सौरमंडल में ग्रहों की स्थिति बदल रही है।
इसलिए कोई अप्रिय घटना घटित ना हो इसके लिए सही रंगों का प्रयोग करें, खेलते समय किसी प्रकार का दुराग्रह मन में ना रखें और सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे को ध्यान में रखकर उत्साह पूर्वक त्योहार मनाएं।