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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 23, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

भाजपा के सीएम पद के दावेदारों को फिर नहीं मिली तवज्जो

By Gaurav KalaEdited By:
Published: Wed, 23 Nov 2016 12:16 PM (IST)Updated: Fri, 25 Nov 2016 06:05 AM (IST)

भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अमित शाह ने एक बार फिर सीएम पद की उम्मीदवारी पर दावेदारों को नजरअंदाज किया। मंच पर चार पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत कई दावेदार मौजूद थे।

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हल्द्वानी, [आशुतोष सिंह]: अल्मोड़ा में भाजपा की परिवर्तन यात्रा रैली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह एक बार फिर सीएम पद की उम्मीदवारी पर दावेदारों को नजरअंदाज कर गए। मंच पर चार पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत कई दावेदारों की मौजूदगी थी, पर शाह ने किसी को भी अतिरिक्त तवज्जो नहीं दी। उन्होंने अपने भाषण के जरिये यह संदेश देने की कोशिश की कि विधानसभा चुनाव में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर और केंद्र सरकार की उपलब्धियों के दम पर ही चुनाव लड़ेंगे।
अमित शाह की परिवर्तन यात्रा रैली को सफल बनाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी, भगत सिंह कोश्यारी, रमेश पोखरियाल निशंक, विजय बहुगुणा, प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट, पूर्व सांसद सतपाल महाराज आदि वरिष्ठ नेताओं ने ताकत झोंक रखी थी। इनमें से अधिकांश सीएम पद की उम्मीदवारी के दावेदार हैं।

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संभावना जताई जा रही थी कि अमित शाह अल्मोड़ा में अपने संबोधन में सीएम पद की उम्मीदवारी को लेकर कुछ संकेत दे सकते हैं। पार्टी के तमाम नेता और कार्यकर्ता इस उम्मीद में लगातार हेलीपैड से लेकर मंच तक अमित शाह के हावभाव पर टकटकी लगाए बैठे थे।
उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट और यात्रा के संयोजक बलराज पासी ने हेलीपैड पर शाह को रिसीव किया और मंच पर साथ आए। मंच पर शाह की एक तरफ अजय भट्ट, भगत सिंह कोश्यारी, रमेश पोखरियाल निशंक और विजय बहुगुणा बैठे थे तो दूसरी ओर भुवन चंद्र खंडूड़ी, सतपाल महाराज, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बिशन सिंह चुफाल और पूरन शर्मा आदि बैठे थे।

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शाह सभी बड़े नेताओं से एक-समान ही व्यवहार करते दिखे। करीब 20 मिनट के संबोधन में शाह या तो प्रदेश सरकार पर हमलावर दिखे या फिर केंद्र और मोदी सरकार की उपलब्धियों का बखान करते हुए। सीएम पद की उम्मीदवारी पर उन्होंने कुछ भी नहीं कहा।

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स्टिंग पर बोले लेकिन बागियों पर चुप रहे
अमित शाह ने अपने भाषण में विधायकों की खरीद-फरोख्त से संबंधित मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्टिंग को तो अपने भाषण में प्रमुखता से उठाया और इसी आधार पर सीएम को उखाड़ फेंकने की लोगों से अपील भी की पर कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में आने वाले विधायकों पर वह चुप रहे।

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गौरतलब है कि बागी विधायकों की भाजपा में आमद से पार्टी के तमाम नेता असंतुष्ट हैं और लगातार किसी न किसी बहाने उन्हें ताने भी मारते रहते हैं। अभी दो दिन पूर्व की ही बात है। लालकुआं में भाजपा की परिवर्तन यात्रा रैली में पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने विजय बहुगुणा की मौजूदगी में ही बागियों पर खूब कटाक्ष किए।
कहा कि कांग्रेस के जिन नेताओं को हम भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरा करते थे अब वे हमारे साथ ही बैठकर खिचड़ी खा रहे हैं। इसके अलावा भी कोश्यारी बहुत कुछ बोले और लोगों ने ठहाके भी खूब लगाए। इस दौरान विजय बहुगुणा लगातार असहज महसूस करते रहे।

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