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आईपीएस नीरू गर्ग और अरुण मोहन जोशी का डेपुटेशन मामला, केंद्र ने दिल्ली हाई कोर्ट से वापस ली याचिका

Published: Sun, 17 May 2026 01:11 PM (IST)

केंद्र सरकार ने आईपीएस नीरू गर्ग और अरुण मोहन जोशी की प्रतिनियुक्ति से जुड़ी अपनी याचिकाएं दिल्ली हाई कोर्ट से वापस ले ली हैं।

दोनों अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन डीआईजी पद भेजने का है मामला

दोनों अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन डीआईजी पद भेजने का है मामला

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जागरण संवाददाता, नैनीताल। उत्तराखंड में आईजी पद पर तैनात आईपीएस अधिकारी नीरू गर्ग और अरुण मोहन जोशी को प्रतिनियुक्ति पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन डीआईजी पद पर भेजने का मामला कानूनी तौर पर पेचीदा हो गया है।

अब केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में दोनों अधिकारियों के विरुद्ध दायर याचिका वापस ले ली है। इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सी हरिशंकर व न्यायमूर्ति ओमप्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने 12 मई को भारत सरकार की ओर से दायर दोनों याचिकाओं पर सुनवाई की थी।

इस सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सालिलिसिटर जनरल ने दोनों याचिकाओं को वापस लेने की अनुमति मांगी थी। इसके साथ ही याचिकाओं में चुनौती दिए गए आदेशों को रद करने के लिए उपयुक्त न्यायाधिकरण से संपर्क करने की स्वतंत्रता भी मांगी। न्यायालय ने अनुमति और स्वतंत्रता प्रदान करते हुए याचिकाओं का निपटारा कर दिया गया। इस निर्णय के बाद भारत सरकार को न्यायाधिकरण के समक्ष राहत मांगने की अनुमति मिल गई है।

बीएसएफ में डीआईजी बनाया गया

दरअसल, वर्ष 2005 बैच की आईपीएस अधिकारी नीरू गर्ग को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन भारत तिब्बत सीमा पुलिस में उप महानिरीक्षक और 2006 के आईपीएस व आईजी स्तर के अधिकारी अरुण मोहन जोशी को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन बीएसएफ में डीआईजी बनाया गया है। इस आशय का आदेश गृह मंत्रालय की ओर से पांच मार्च 2026 को जारी हुए थे।

राज्य सरकार की ओर से छह मार्च 2026 को दोनों अधिकारियों को कार्यमुक्त करने का आदेश पारित किया था। जिसे दोनों अधिकारियों ने याचिका दायर कर उत्तराखंड हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाओं में कहा गया कि वह साल 2005 और 2006 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं, अब उन्हें प्रतिनियुक्ति पर केंद्र सरकार में भेजा जा रहा है।

हाई कोर्ट ने मामला केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) को रेफर कर दिया था। कैट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए उत्तराखंड सरकार की ओर से प्रतिनियुक्ति पर भेजने से संबंधित आदेश पर रोक लगा दी थी। जब आदेश का अनुपालन नहीं हुआ तो दोनों अधिकारियों की ओर से राज्य के गृह सचिव व डीजीपी के विरुद्ध अवमानना याचिका दायर की गई। इस मामले में कैट से गृह सचिव व डीजीपी को अवमानना नोटिस जारी हुए थे। इसी बीच भारत सरकार की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट में इन अधिकारियों के विरुद्ध कैट में याचिका दायर की थी।

अब केंद्र ने कैट से याचिका वापस ले ली। कानूनी जानकारों के अनुसार अब भारत सरकार की ओर से स्टे पर रोक से संबंधित आदेश को कैट में चुनौती दी जाएगी। यह पहला मौका जब राज्य के दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति का मामला कानूनी तौर पर पेचीदा हो गया है।