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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 02, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

डेढ़ साल से हाईवे पर उत्पात मचा रहे हाथी को पकडऩे में विभाग नाकाम nainital news

By Skand ShuklaEdited By:
Updated: Tue, 03 Dec 2019 12:49 PM (IST)

करीब ढेड़ साल से हाईवे पर उत्पात मचा रहे टस्कर हाथी को पकडऩे के लिए वन विभाग के अभी तक सारे प्रयास पूरी तरह से विफल रहे हैं।

डेढ़ साल से हाईवे पर उत्पात मचा रहे हाथी को पकडऩे में विभाग नाकाम nainital news
डेढ़ साल से हाईवे पर उत्पात मचा रहे हाथी को पकडऩे में विभाग नाकाम nainital news

रामनगर, जेएनएन : करीब ढेड़ साल से  हाईवे पर उत्पात मचा रहे टस्कर हाथी को पकडऩे के लिए वन विभाग के अभी तक सारे प्रयास पूरी तरह से विफल रहे हैं। उत्पाती हो चुका हाथी भी वन विभाग को ठेगा दिखाते हुए और अधिक आक्रमक होता जा रहा है। यही वजह रही कि शनिवार को यात्री बस में हमले के दौरान शिक्षक गिरीश चंद्र पांडे को अपनी जान गंवानी पड़ी।

2018 से लगातार टस्कर हाथी आए दिन कभी यात्रियों पर तो कभी वाहनों पर हमले बोल देता है। रामनगर से अल्मोड़ा जाने वाले मार्ग पर हालात यह हैं कि वाहन चालक भी दुआ करते हैं कि रास्ते में टस्कर हाथी न मिले। डेढ़ साल में इस एक टस्कर ने अनगिनत लोगों को सड़कों पर दौड़ाया तो कई वाहनों को क्षतिग्रस्त कर डाला। वन विभाग ने भी हाथी को भगाने के लिए कभी आटे के गोले में मिर्च डाली, तो कभी आतिशबाजी की। इस सबके बाबजूद हाथी और हमलावर होता ही जा रहा है।

अब हाथी की तलाश ड्रोन से होगी

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक राहुल ने बताया कि टस्कर की तलाश अब ड्रोन कैमरे से की जाएगी। हाथी की लोकेशन लेने के बाद उसे ट्रैंकुलाइज कर उसके गले में रेडियोकॉलर लगाया जाएगा। जिसके बाद हाथी की लोकेशन हर समय उपलब्ध रहेगी। हाथी की मौजूदगी के हिसाब से हाईवे के आसपास रहने पर उसे जंगल की ओर खदेडऩे का प्रयास करेंगे। साथ ही वाहन चालकों को भी समय रहते सतर्क कर दिया जाएगा।

उसकी लाकेशन देखने की तैयारी हो रही है।

खाने की सुगंध से खिंचा आता है टस्कर

रामनगर निवासी वन्यजीव विशेषज्ञ संजय छिम्वाल की मानें तो टस्कर वाहनों में खाने की सुगंध पाकर हाईवे पर धमक उठता है। जो अपने भोजन के लिए वाहनों में तोडफोड़ करता है। उस दौरान जो भी उसके सामाने आता है उस पर वह आक्रामक हो जाता है। उसके सामने हार्न बजा देना भी खतरे से खाली नहीं होता।

हाथी ने अब तक किए हमले

03 दिसंबर 2018: कार सवार दो शिक्षकों को दौडाया।

 27 जनवरी 2019:  कुमेरिया में कार पर हमला किया। दो लोगों ने भाग कर बचाई जान।

 29 जनवरी 2019: मोहान में बुलेरो पर किया हमला। 

26 फरवरी 2019: धूमाकोट जाने वाली यात्री बस पर हमला।

22 मार्च 2019: मरचूला मार्ग पर बस में तोडफ़ोड

 22 नवंबबर 2019: मरचूला मार्ग पर दो वाहनों पर किया हमला।

शिक्षक की गमगीन माहौल में हुई  अंत्येष्टि

हाथी के हमले में मारे गए शिक्षक गिरीश चंद्र पांडे का अंतिम संस्कार रविवार को किया गया। अंतिम यात्रा में शामिल लोगों में भी वन विभाग के हीलाहवाली वाले रवैये को लेकर नाराजगी थी। वहीं, बिजरानी जोन के रेंजर राजकुमार ने बताया कि मृतक के परिजनों को नियमानुसार  मुआवजा दिया जाएगा। हाथी पर नजर रखने के लिए गश्त की जा रही है, ताकि और कोई हादसा न हो। 

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