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हल्द्वानी के जंगलों में अब एआई तकनीक से होगी 24 घंटे पहरेदारी, पढ़ें कैसे लगेगी अवैध शिकार और वृक्षों के कटान रोक

Published: Wed, 09 Sep 2026 09:30 PM (IST)

हल्द्वानी वन प्रभाग ने जंगल की निगरानी के लिए एआई आधारित फारेस्ट अकास्टिक सर्विलांस सिस्टम का सफल परीक्षण किया है। ...और पढ़ें

हल्द्वानी वन प्रभाग की ओर से जंगल में लगाया गया अकास्टिक सर्विलांस सिस्टम। सौ. वन विभाग

हल्द्वानी वन प्रभाग की ओर से जंगल में लगाया गया अकास्टिक सर्विलांस सिस्टम। सौ. वन विभाग

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जागरण संवाददाता, हल्द्वानी। अब जंगल की पहरेदारी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) आधारित तकनीक की मदद से होगी। हल्द्वानी वन प्रभाग ने भारत की पहला एआइ आधारित फारेस्ट अकास्टिक सर्विलांस सिस्टम का सफल ट्रायल किया है।

इसकी मदद से जंगल में किसी भी तरह की अवैध गतिविधि का अलर्ट मिलेगा। इस सिस्टम में एआइ के साथ-साथ एज कम्प्यूटिंग, ध्वनिक सेंसर तथा लंबी दूरी की वायरलेस संचार तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

इस डिवाइस को ट्रायल के दौरान नंधौर रेंज के एक फारेस्ट रूट पर लगाया गया। इसकी मदद से रियल टाइम में अवैध वृक्ष कटान, वन्यजीव अपराधों की पहचान और वन्यजीवों की ध्वनियों की निगरानी की गई। इसने ऐसी आवाजों की पहचान कर कंट्रोल रूम में अलर्ट भेजे, ताकि वनकर्मी त्वरित कार्रवाई कर सकें।

इस स्वदेशी तकनीक की खास बात यह है कि ये जंगल के दुर्गम और दूरस्थ इलाके जहां मोबाइल नेटवर्क और बिजली उपलब्ध नहीं है, वहां भी रेडियो सिग्नल और सौर ऊर्जा से 24 घंटे संचालित होता है।

इसे वाहन स्टार्ट होने और चलने, कुल्हाड़ी से पेड़ काटने, गोली चलने की आवाज समेत अन्य संदिग्ध मानवीय गतिविधियों की पहचान करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है।

अधिकारी का बयान

यह तकनीक अवैध वृक्ष कटान, लकड़ी तस्करी, वन्यजीव अपराधों तथा अवैध शिकार की रोकथाम में अत्यंत प्रभावी सिद्ध होगी। रियल टाइम में संदिग्ध गतिविधियों की पहचान होने से संवेदनशील वन क्षेत्रों की निगरानी बेहतर तरीके से हो सकेगी।

कुंदन कुमार, डीएफओ, हल्द्वानी वन प्रभाग