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हल्द्वानी आईएसबीटी प्रोजेक्ट: शिलान्यास के दस साल बाद भी 'गायब', फाइलें धूल फांक रही

Published: Fri, 04 Sep 2026 02:19 PM (IST)

हल्द्वानी का महत्वपूर्ण आईएसबीटी प्रोजेक्ट, जिसका शिलान्यास दस साल पहले हुआ था, आज भी धरातल पर नहीं है।

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जागरण संवाददाता, हल्द्वानी। कुमाऊं के प्रवेशद्वार हल्द्वानी के लिए बेहद अहम आइएसबीटी प्रोजेक्ट शिलान्यास के दस साल बाद भी धरातल पर 'लापता' है। पुरानी जगह पर काम बंद करवाने के बाद सरकार ने कई बार दावे किए थे कि जल्द नई जमीन का चयन कर काम शुरू किया जाएगा।

लेकिन दो विधानसभा चुनाव बीतने के बाद भी आइएसबीटी के नाम पर एक ईंट भी नजर नहीं आती। अब तीसरे चुनाव की तैयारियों का दौर शुरू हो चुका है। जिम्मेदार नई भूमि तो तलाश नहीं सके। पुरानी भी कब्जे से चली गई। हैरानी की बात यह है कि सड़क से सदन तक आइएसबीटी के बार मुद्दे के तौर पर गूंजने के बावजूद अब भी इससे जुड़ी फाइलें धूल ही फांक रही है।

गौलापार में आइएसबीटी के लिए आठ हेक्टेयर वनभूमि के हस्तांतरण के बाद यहां मौजूद खैर प्रजाति के 2625 पेड़ों का कटान कर 14 अक्टूबर 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 75 करोड़ के प्रोजेक्ट का शिलान्यास कर निजी कंपनी को निर्माण का जिम्मा सौंपा था। लेकिन मई 2017 में नरकंकाल का मुद्दा उछाल प्रोजेक्ट को बंद कर दिया गया।

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नई जगह की तलाश को लेकर समिति का गठन किया गया। जिसके बाद तीनपानी, कमलुवागांजा, एफटीआई परिसर के पीछे के जंगल का सर्वे हुआ। लेकिन किसी भी जगह पर मुहर नहीं लग सकी। वहीं, अप्रैल 2026 में परिवहन विभाग मुख्यालय स्तर से गठित कमेटी फिर से हल्द्वानी पहुंची। गौलापार की पुरानी जमीन के साथ ही तीनपानी वाली भूमि का निरीक्षण किया गया। इसके बाद कमेटी ने गौलापार की आठ हेक्टेयर भूमि को ही बेहतर बताते हुए रिपोर्ट शासन को सौंप भी दी।

वन विभाग से जमीन लेने को दोबारा आवेदन करेंगे: शर्मा

उप परिवहन आयुक्त सुनील शर्मा के अनुसार कमेटी ने गौलापार की पुरानी जमीन को ही आइएसबीटी के निर्माण के लिए बेहतर बताया है। लेकिन यह जमीन दोबारा फारेस्ट के पास चली गई थी। जिसे वापस लेने के लिए दोबारा आवेदन किया जाएगा।

आइएसबीटी का मामला हाई कोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा था। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश थे कि किसी ऐसी भूमि का चयन हो। जहां निर्माण से पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो। इस लिहाज से भी गौलापार की आठ हेक्टेयर भूमि को बेहतर माना गया।

आइएसबीटी से जुड़े अहम घटनाक्रम

  • 2015 में गौलापार में आठ हेक्टेयर वन भूमि परिवहन विभाग के नाम हुई।
  • 2015-16 के बीच जमीन से जुड़े 2625 खैर प्रजाति के पेड़ काटे गए।
  • 14 अक्टूबर 2016 को सरकार ने आइएसबीटी का शिलान्यास किया।
  • 22 अक्टूबर 2016 को निजी कंपनी ने निर्माण कार्य शुरू करवाया।
  • मई 2017 में नरकंकाल मिलने का मुद्दा उछाला गया।
  • जून 2017 में सरकार ने काम पर रोक लगवा दी।
  • फरवरी 2018 में अफसरों ने नई जमीन की तलाश शुरू कर दी।
  • 13 अगस्त 2018 को परिवहन मंत्री ने तीनपानी की जमीन पर मुहर लगाई।
  • अप्रैल 2026 में गठित नई समिति भूमि की तलाश को हल्द्वानी पहुुंची।