जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क: गुलदार और हाथी के बेसहारा बच्चों को मिल रहा वनकर्मियों का वात्सल्य
जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क का रेस्क्यू सेंटर बेसहारा गुलदार शावक और हाथी के बच्चे को ममता और वात्सल्य दे रहा है। ...और पढ़ें

कार्बेट के रेस्क्यू सेंटर में फरवरी 2023 में लाया गया गुलदार का शावक। वहीं, रेस्क्यू सेंटर में हाथी के शिशु को दूध पिलाते कार्बेट के निदेशक डा. साकेत बडोला। सौ:कार्बेट

समय कम है?
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त्रिलोक रावत, रामनगर (नैनीताल)। जिम कार्बेट नेशनल पार्क के रेस्क्यू सेंटर की पहचान खूंखार बाघों की दहाड़ और गुलदारों के गुर्राने से होती है लेकिन यह सेंटर ममता व वात्सल्य की छांव भी देता है।
पिंजरों के पीछे खूंखार बाघ ही नहीं बल्कि बेसहारा बचपन भी अपने अस्तित्व की नई कहानी भी लिख रहा है। यह कहानी है एक नन्हे गुलदार और एक हाथी के बच्चे की है। जिन्हें नियति ने अपनों से दूर कर दिया लेकिन वनकर्मियों ने अपना बनकर उन्हें गले लगा लिया।
तराई पश्चिमी वन प्रभाग रामनगर के जंगल में फरवरी 2023 में गुलदार के डेढ़ माह के शावक को उसकी मां ने कमजोर समझ छोड़ दिया था। उसे वनकर्मियों की मदद से ढेला स्थित रेस्क्यू सेंटर लाया गया।

धीरे-धीरे वह देखरेख करने वालों से घुलमिल गया और उन्हें ही अपनी मां मान बैठा। आज वह साढ़े तीन साल का व्यस्क गुलदार हो चुका है। ऐसी ही दास्तान उस नन्ही मादा हाथी की है, जो सितंबर 2025 में निहाल नदी की उफनती लहरों में बह गई थी।
वन विभाग ने उसे तो बचा लिया लेकिन उसकी मां का पता नहीं चल सका। तब वह एक माह की थी और काफी जख्म होने से घायल भी। कार्बेट के वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डा. दुष्यंत शर्मा ने हाथी के बच्चे को पूरी तरह ठीक किया।
बिना मां के शावक व हाथी के शिशु को बचाना काफी मुश्किल था लेकिन अधिकारियों व कार्बेट स्टाफ की ममता और वात्सल्य से यह संभव हो पाया।
कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डा. साकेत बडोला के अनुसार रेस्क्यू सेंटर में गुलदार व हाथी के शिशु का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। शुरूआत में कुछ दिक्कतें आई लेकिन धीरे-धीरे दोनों सर्वाइव कर गए। समय-समय पर दोनों की स्वास्थ्य जांच भी होती है।
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गुलदार व हाथी के बच्चे को पिलाया दूध
गुलदार के शावक को रेस्क्यू सेंटर में रिकवरी फूड जिसमें पोषक तत्व शामिल होते हैं, वह दिया गया। साथ ही तीन माह का होने तक उसे दूध भी पिलाया गया। दांत मजबूत होने पर उसे मीट देना शुरू कर दिया गया।
वहीं हाथी के एक माह के बच्चे को शुरू में मिल्क स्टार्टर पिलाया गया, जिसमें दूध, अनाज, प्रोटीन, विटामिन व पचाने के लिए संतुलित मिश्रण होता है।
जंगल नहीं देखा इसलिए शिकार नहीं सीख पाया गुलदार
पशु चिकित्साधिकारी डा. दुष्यंत शर्मा ने बताया कि व्यस्क हो चुका गुलदार व 10 माह का हाथी का शिशु वनकर्मियों से काफी घुलमिल गए हैं।
चूंकि गुलदार का बचपन जंगल के बजाय रेस्क्यू सेंटर में ही बीता इसलिए वह प्राकृतिक रूप से शिकार करने के गुर भी नहीं सीख पाया है। ऐसे में उसे रेस्क्यू सेंटर में ही रखा जाएगा। मादा हाथी शिशु को अभी भी देखभाल की जरूरत है।