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    कैंची धाम बाईपास 15 जून से पहले हो जाएगा शुरू, सुगम होगा यातायात

    Updated: Tue, 10 Feb 2026 08:24 AM (IST)

    लोक निर्माण विभाग मंत्री सतपाल महाराज ने भीमताल में कैंची धाम बाईपास परियोजना की समीक्षा की। 18.2 किलोमीटर लंबा यह बाईपास 15 जून, 2026 तक चालू हो जाएग ...और पढ़ें

    विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम। जागरण

     विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम। जागरण

    HighLights

    1. कैंची धाम बाईपास 15 जून 2026 तक होगा चालू।

    2. पर्यटन सीजन से पहले बनेगा अस्थायी बैली ब्रिज।

    3. सतपाल महाराज ने गुणवत्तापूर्ण कार्य के दिए निर्देश।

    संवाद सहयोगी, जागरण, भीमताल। विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम की यात्रा सुगम बनाने के लिए प्रयास तेज हो गए हैं। 15 जून, 2026 तक बाईपास भी चालू जाएगा। शिप्रा नदी पर 74 मीटर लंबा पुल के पर्यटन सीजन से पहले बनने की संभावना नहीं दिख रही है। ऐसे में लोक निर्माण विभाग अस्थायी राहत के लिए बैली ब्रिज का निर्माण करेगा।

    सोमवार को भीमताल पहुंचे लोक निर्माण विभाग मंत्री सतपाल महाराज ने योजना की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को तय समय पर काम पूरा करने के साथ ही गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।

    विकास भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में लोनिवि मंत्री ने कहा कि कैंची धाम आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की यात्रा को सरल, सुगम और सुरक्षित बनाया जाए। यह बाईपास 18.2 किलोमीटर लंबा है। भवाली सेनिटोरियम से शुरू होकर रातिघाट होते हुए पाडली तक बनना है। इसमें दो चरणों में काम पूरा हो चुका है।

    दूसरे चरण के कार्य में 10.22 किलोमीटर में पहाड़ कटान पूरा हो गया है। अब पुल अन्य कार्य होने हैं। वहीं बैली ब्रिज का निर्माण कार्य पर्यटन सीजन शुरू होने से पहले तैयार हो जाता है तो पर्वतीय क्षेत्रों को जाने वाले लोगों को भी राहत मिलेगी और लंबे समय तक जाम से जूझना नहीं पड़ेगा।

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    इसके साथ ही सतपाल महाराज ने 1258.12 लाख रुपये की पांच योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास भी किया। स्थानीय लोगों से संवाद भी किया।

    15 जून को कैंची धाम में लगता है मेला
    प्रत्येक वर्ष 15 जून को कैंची धाम में भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इस दिन विशाल भंडारा होता है। एक से दो लाख श्रद्धालु बाबा नीब करौरी महाराज के दर्शन करने पहुंचते हैं। बाबा जी ने ही 15 जून, 1964 को धाम की प्रतिष्ठा का दिन निर्धाारित किया था। इसी दिन हनुमानजी और अन्य मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा हुई थी।

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