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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 09, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अब हरकत में आने लगा है सूरज, दक्षिणी हिस्से में उभरा नन्हा सन स्पॉट nainital news

By Skand ShuklaEdited By:
Updated: Mon, 09 Mar 2020 09:09 AM (IST)

34 दिन शांत रहने के बाद सूरज अब हरकत में आया है। एक नन्हा सन स्पॉट सूर्य में उभरा है। इस सन स्पॉट से सोलर फ्लेयर होने की कोई संभावना नहीं है।

अब हरकत में आने लगा है सूरज, दक्षिणी हिस्से में उभरा नन्हा सन स्पॉट nainital news
अब हरकत में आने लगा है सूरज, दक्षिणी हिस्से में उभरा नन्हा सन स्पॉट nainital news

नैनीताल, रमेश चंद्रा : 34 दिन शांत रहने के बाद सूरज अब हरकत में आया है। एक नन्हा सन स्पॉट सूर्य में उभरा है। इस सन स्पॉट से सौर प्रज्‍वाल (सोलर फ्लेयर) होने की कोई संभावना नहीं है। सौर प्रज्वाल सूरज की सतह के किसी स्थान पर अचानक बढ़ने वाली चमक को कहते हैं। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के पूर्व निदेशक व वरिष्ठ सौर वैज्ञानिक डॉ. वहाबउद्दीन ने बताया कि नया सन स्पॉट सूर्य के दक्षिणी गोलार्ध में उभरा है, जो बहुत छोटा है। यह सन स्पॉट आने वाले दिनों में फैलेगा या फिर समाप्त हो जाएगा, फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता। दुनियाभर के वैज्ञानिक इस पर नजर रखे हुए हैं।

सोलर साइकिल सत्र होता है 11 वर्ष का

सूर्य 25वें सोलर साइकिल से गुजर रहा है। नया सोलर साइकिल सत्र गत वर्ष शुरू हो चुका है। प्रत्येक सत्र 11 साल का होता है। इस सत्र को शुरू हुए कई महीने बीत जाने के बावजूद सूर्य शांत ही बना हुआ है। इस बीच कुछ छोटे आकार के सन स्पॉट देखे गए। इस सोलर साइकिल में सन स्पॉट उभरने की गति बहुत धीमी नजर आ रही है। उम्मीद है कि जैसे-जैसे यह सत्र आगे बढ़ेगा, सन स्पॉट्स की संख्या भी बढऩी शुरू हो जाएगी। यह नया सत्र 2030 तक चलेगा। रविवार को सूर्य के दक्षिणी गोलार्ध में यह सन स्पॉट उभरा है। जिस पर एरीज के वैज्ञानिक नजर रखे हुए हैं।

सैटेलाइट्स से खतरनाक होती हैं सोलर फ्लेयर

सन स्पॉट्स का बनना सूर्य की सक्रियता को दर्शाता है। जिनसे सोलर फ्लेयर बनती है और चुंबकीय तूफान उठते हैं। यह तूफान पृथ्वी तक पहुंचते हैं। धरती के वातावरण में फैले बेशकीमती सैटेलाइट्स के लिए सोलर फ्लेयर बेहद खतरनाक है। सोलर फ्लेयर से निकलने वाले उच्च ऊर्जावान कण सैटेलाइट्स को डैमेज कर सकते हैं। जिनसे संचार सेवाएं बाधित होती हैं। जिस कारण दुनियाभर की स्पेस एजेंसियां इन पर 24 घंटे निगाह रखते हैं। इनके अलावा इलेक्ट्रानिक व विद्युत उपकरणों के लिए भी यह बड़ा खतरा है। 

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