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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 18, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    मल्ला महल को धरोहर बनाने का सपना अधूरा, चंद राजा ने कराया था निर्माण nainital news

    By Skand ShuklaEdited By:
    Updated: Mon, 18 Nov 2019 11:38 AM (IST)

    सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में शाही सल्तनत के गवाह रहे मल्ला महल को धरोहर के रूप संजोने और यहां संग्रहालय बनाने का सपना आज भी अधूरा है। ...और पढ़ें

    मल्ला महल को धरोहर बनाने का सपना अधूरा, चंद राजा ने कराया था निर्माण nainital news
    मल्ला महल को धरोहर बनाने का सपना अधूरा, चंद राजा ने कराया था निर्माण nainital news

    अल्मोड़ा, बृजेश तिवारी : सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में शाही सल्तनत के गवाह रहे मल्ला महल को धरोहर के रूप संजोने और यहां संग्रहालय बनाने का सपना आज भी अधूरा है। एक दौर में राजशाही सल्तनत का गवाह रहे इस मल्ला महल में वर्तमान में कलक्ट्रेट संचालित है। इसके इतिहास को देखते हुए यहां से कलक्ट्रेट काे शिफ्ट कर इसे धरोहर के रूप में विकसित करने का सपना तो देखा गया। लेकिन तंत्र की उपेक्षा के कारण यह सपना आज भी अधूरा है।

    रुद्र चंद ने की थी मल्‍ला महल की स्‍थापना

    अल्मोड़ा के मल्ला की बात करें तो इसका इतिहास काफी पुराना है। पत्थर और लकडिय़ों से बने इस महल में सदियों पुराना इतिहास बसता है। अल्मोड़ा के इतिहास पर गौर करें तो यह कस्बा स्थापना से पूर्व कत्यूरी राजा बैचलदेव के अधीन था। उस समय इस शहर को राजपुर नाम से जाना जाता था। 17 वीं शताब्दी में चंद राजाओं ने इस शहर पर अपना कब्जा जमाया था। तत्कालीन राजा रूद्र चंद ने अल्मोड़ा के मध्य में मल्ला महल की स्थापना की। वर्ष 1971 में नेपाल के गोरखाओं ने अपने राज्य के विस्तार के लिए अल्मोड़ा पर आक्रमण किया और इस पर अपना कब्जा जमा लिया।

    अंग्रेजों ने रखा था महल को अपने कब्‍जे में

    19 वीं शताब्दी में अंग्रेजों ने अल्मोड़ा पर हमला किया और इसे अपने कब्जे में ले लिया। 1815 में पहले जिलाधिकारी के तौर पर ई डब्ल्यू गार्डनर ने पहले जिलाधिकारी के तौर पर यहां कुर्सी संभाली और जिसके बाद कई सालों तक अंग्रेजों ने यहां राज किया। अतीत की इन यादों को जहां कई सल्तनतों ने अपने दरबार सजाए उसका मौन गवाह मल्ला आज भी यहां की रियासतों का अकेला गवाह है। इस मल्ला महल में 1588 में चंद राजाओं द्वारा बनाया गया रामशिला मंदिर आज भी लोगों की आस्था का केंद्र है। नागर शैली में स्थानीय सामग्री से बने इस महल में वर्तमान में कलक्ट्रेट संचालित है।

    धरोहर के रूप में संरक्षित करने की थी योजना

    ऐतिहासिक मल्ला महल के इतिहास को देखते हुए इसे धरोहर के रूप में विकसित करने की योजना थी। जिसके लिए शासन ने वर्ष 2015 में करीब 29.9 करोड़ रुपये की योजना तैयार की और वर्तमान कलक्ट्रेट के लिए विकास भवन के पास हाईटेक भवन बनाने की योजना बनाई। शुरूआत में योजना के लिए करीब 12 करोड़ रुपये अवमुक्त किए गए और नए कलक्ट्रेट भवन का निर्माण कार्य भी शुरू कराया गया। योजना के तहत 31 मार्च 2019 को नए भवन का कार्य पूरा हो जाना चाहिए था और कलक्ट्रेट को वहां शिफ्ट कर मल्ला महल को धरोहर ओर संग्रहालय के रूप में विकसित करना था। लेकिन कार्यदायी संस्था को बजट न मिल पाने के कारण नए कलक्ट्रेट भवन का कार्य आज भी पूरा नहीं हो पाया है।

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    भेजा गया है संरक्षित करने का प्रस्‍ताव

    राहुल चौबे, पर्यटन अधिकारी, अल्मोड़ा ने बताया कि मल्ला महल को धरोहर के रूप में संरक्षित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। शासन के निर्देशों के आधार पर ही इस पर कार्रवाई की जाएगी।

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