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पश्चिमी हिमालय में किंग कोबरा का गढ़ बना नैनीताल, 2300 मीटर की ऊंचाई पर बना रहा पनाहगाह

By Lalit Mohan BelwalEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Wed, 21 Oct 2026 06:06 AM (IST)Updated: Wed, 21 Oct 2026 06:49 AM (IST)

उत्तराखंड का नैनीताल जिला पश्चिमी हिमालय में किंग कोबरा के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह बन गया है, जहाँ 2300 मीटर की ऊंचाई पर उनके घोंसले पाए गए हैं।

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HighLights

  1. नैनीताल किंग कोबरा के लिए पश्चिमी हिमालय का गढ़।

  2. मुक्तेश्वर में 2300 मीटर पर मिला विश्व का सबसे ऊंचा घोंसला।

  3. वाहनों से मौतें और चीड़ के पत्तों के घोंसले प्रमुख तथ्य।

ललित मोहन बेलवाल। हल्द्वानी। उत्तराखंड का नैनीताल जिला किंग कोबरा के लिए सबसे सुरक्षित पनाहगाह बनकर उभरा है। परंपरागत रूप से पश्चिमी घाट (उत्तर में ताप्ती नदी घाटी से दक्षिण में कन्याकुमारी तक) में किंग कोबरा बहुतायत में हैं, लेकिन पश्चिम हिमालय में सबसे पहले नैनीताल के भवाली में साल 2006 में ही मिला था।

वर्ष 2012 में समुद्र तल से 2300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मुक्तेश्वर (नैनीताल) में मिले किंग कोबरा के घोंसले को दुनिया की सर्वाधिक ऊंचाई पर मौजूदगी का रिकार्ड माना गया। उत्तराखंड वन विभाग के अनुसंधान केंद्र ने 2021 में किंग कोबरा पर शोध शुरू करवाया। इसमें 2015 से 2020 के बीच प्रदेश में किंग कोबरा की मौजूदगी वाले जिलों के डाटा को आधार बनाया गया।

सामने एक चौंकाने वाले तथ्य

इसके तहत नैनीताल वन प्रभाग में सर्वाधिक 83 बार, देहरादून में 32, पौड़ी में 12, उत्तरकाशी में तीन व हरिद्वार में दो बार यह रिपोर्ट किया गया था। सर्वाधिक मौजूदगी से अध्ययन नैनीताल पर केंद्रित रहा। इस दौरान सांपों के इस बादशाह के बारे में कई तथ्य सामने आए।

अब तक के शोध में सामने आया है कि किंग कोबरा के लिए सबसे बड़ा खतरा गाड़ियों की आवाजाही है। वर्ष 2022 से 2024 के बीच पांच किंग कोबरा की वाहनों से कुचले जाने से मौत हो गई। वन अनुसंधान केंद्र के जूनियर रिसर्च फैलो ज्योति प्रकाश के अनुसार शोध में यह भी सामने आया है कि लगभग 86% मामलों में किंग कोबरा के घोंसले चीड़ की पत्तियों (पिरुल) से बने हैं। इससे किंग कोबरा को जरूरत के मुताबिक गर्मी मिलती है।

मुक्तेश्वर में सर्वाधिक ऊंचाई पर किंग कोबरा का घोंसला मिलने का है विश्व रिकॉर्ड

किंग कोबरा का प्रमुख प्राकृतिक वास गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु आदि पर्वत शृंखलाएं हैं। उत्तराखंड में पाए जाने वाले किंग कोबरा को लेकर सामने आया कि दोनों जगहों पर पाए जाने वाले किंग कोबरा अलग-अलग हैं।

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जहां पश्चिमी घाट में पाए जाने वाले किंग कोबरा की लंबाई 12 से 14 फीट होती है, वहीं उत्तराखंड में पाए जाने वाला किंग कोबरा औसतन 10 से 12 फीट लंबा पाया गया। दोनों जगहों पर पाए जाने वाले किंग कोबरा का डीएनए भी अलग-अलग है।

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