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नैनीताल में दूषित पानी से फैली बीमारी, हाईकोर्ट ने अधिकारियों को ठहराया जिम्मेदार

Published: Tue, 08 Sep 2026 04:57 PM (IST)

नैनीताल के ज्योलीकोट व आसपास के गांवों में दूषित पेयजल से फैली बीमारियों और मौतों पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

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जागरण संवाददाता, नैनीताल। जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर ज्योलीकोट सहित समीपवर्ती गांवों गांजा, वीरभट्टी, छींणा, बेलुवाखान और सरियाताल क्षेत्र में दूषित पेयजल के कारण फैले जनजनित रोगों और इस रोग से ग्रसित एक छात्र व एक महिला की मौत पर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

कोर्ट ने अधिकारियों की लापरवाही पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि समय रहते सीवर और पेयजल की पाइपलाइनों की मरम्मत कर ली जाती, तो ग्रामीणों को इस संकट का सामना न करना पड़ता।

कोर्ट ने मामले की जांच के आदेश देने के साथ ही राहत कार्य की मॉनिटरिंग के निर्देश दिए हैं। इस दौरान जल संस्थान के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि पुराने कूड़ा खड्ड के पास जल स्रोत में सीवर का पानी मिक्स होने की वजह से यह स्थिति पैदा हुई।

इस पर कोर्ट ने सख्त लहजे में अधिकारियों से कहा कि बीमारी आपकी लापरवाही से फैली है, इसलिए इसके इलाज और पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी भी आपकी ही होगी।

मंगलवार को क्षेत्र के निवासी अधिवक्ता रवि बिष्ट की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, सीएमओ डा. रश्मि पंत तथा जल संस्थान व जल निगम के शीर्ष अधिकारी व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश हुए।

कोर्ट ने पेयजल निगम के सचिव को कुमाऊं क्षेत्र के लिए प्रस्तावित वाटर टेस्टिंग लैब को जल्द से जल्द मंजूरी देने के निर्देश दिए हैं।

इसके साथ ही राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को नैनीताल और आसपास के 20 से 25 विभिन्न जल स्रोतों से सैंपल लेकर छह दिनों में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।

खंडपीठ ने इसे महामारी जैसी स्थिति करार देते हुए जिलाधिकारी को राहत कार्यों की स्वयं मॉनिटरिंग करने, प्रभावित इलाकों में टैंकरों से शुद्ध पेयजल भिजवाने और सीवर लीकेज की समस्याओं के समाधान के लिए तत्काल हेल्पलाइन नंबर जारी करने को कहा है।

क्षेत्र की बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं पर टिप्पणी करते हुए खंडपीठ ने कहा कि 21वीं सदी में ऐसी स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। यदि सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं हैं, तो बिना किसी संकोच के बाहर से विशेषज्ञ डाक्टरों की टीम बुलाई जानी चाहिए।

कोर्ट के रुख को देखते हुए जिलाधिकारी ने मरीजों के निजी लैब में एलाइजा व अन्य जरूरी टेस्ट कराने के लिए चार लाख रुपये का बजट जारी कर दिया है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर और बढ़ाया जाएगा।

इस दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दर्जनों मरीजों की लीवर रिपोर्ट पेश कर प्रभावितों के निश्शुल्क इलाज और मुआवजे की मांग रखी गई।

सीएमओ की ओर से अदालत को बताया गया कि पानी के दूषित होने से बीमारियां फैली हैं और प्रभावित गांवों में आठ डाक्टरों की टीम, एक एम्बुलेंस तथा मेडिकल स्टाफ तैनात किया गया है।

घर-घर जाकर क्लोरीन टैबलेट्स और ओआरएस के पैकेट बांटे जा रहे हैं। मामले में अगली सुनवाई 15 सितंबर को हाेगी, उस दिन भी डीएम, सीएमओ सहित अन्य अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा।

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