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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 22, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Patakha Godam : शहर बारूद के ढेर से मुक्त, 11 पटाखा गोदामों का लाइसेंस निरस्त

    By ganesh joshiEdited By: Mohammed Ammar
    Updated: Fri, 22 Sep 2023 09:36 PM (IST)

    पटाखा व्यवसायी मनमानी करते रहे। जब मामला हाई कोर्ट पहुंचा तो जिला प्रशासन ने इन दुकानदारों को गोदाम के लिए दूसरी जगह बताने को कहा मगर किसी ने भी ऐसा न ...और पढ़ें

    Patakha Godam : शहर बारूद के ढेर से मुक्त, 11 पटाखा गोदामों का लाइसेंस निरस्त
    Patakha Godam : शहर बारूद के ढेर से मुक्त, 11 पटाखा गोदामों का लाइसेंस निरस्त

    जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : आखिरकार शहर को बारूद के ढेर से मुक्त कर दिया गया है। बार-बार पहुंच व रसूख का इस्तेमाल कर पटाखा व्यवसायी आबादी के बीच में पटाखा गोदाम के लाइसेंस का नवीनीकरण करवा लेते थे। इससे खतरा बना रहता था। मामला कोर्ट में जाने के बाद डीएम वंदना ने आबादी के बीच बने 11 पटाखा गोदामों का लाइसेंस निरस्त कर दिया है।

    वास्तविक स्थिति जानने के लिए शुक्रवार को सिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह के नेतृत्व में निरीक्षण किया गया। इस दौरान उन्हें चौंकाने वाली स्थिति देखने को मिली। वर्ष 2011 से शहर के घनी आबादी के बीच पटाखा गोदाम संचालित हैं। बार-बार इन्हें प्रशासन नोटिस भी देता था, फिर भी गोदाम शिफ्ट नहीं कराए गए।

    पटाखा व्यवसायी मनमानी करते रहे। जब मामला हाई कोर्ट पहुंचा तो जिला प्रशासन ने इन दुकानदारों को गोदाम के लिए दूसरी जगह बताने को कहा, मगर किसी ने भी ऐसा नहीं किया। इसके चलते आठ सितंबर को सभी 11 पटाखा गोदामों का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया। इन गोदामों में पटाखों की स्थिति जानने के लिए शुक्रवार को सिटी मजिस्ट्रेट ने मुख्य अग्निशमन अधिकारी, नायब तहसीलदार के साथ निरीक्षण किया।

    सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि अधिकांश दुकानदारों के गोदाम में पटाखे नहीं मिले। कालाढूंगी चौराहे की दुकान में कुछ मात्रा में पटाखा मिले। इन्हें नष्ट कर दिया गया। साथ ही सभी गोदाम स्वामियों से लिखित में लिया गया है कि फिर से इस जगह पर पटाखा व्यवसाय नहीं करेंगे।

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    गोदाम ऐसी जगह जहां फायर ब्रिगेड भी नहीं जा सके

    सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि निरीक्षण के दौरान हैरान करने वाली स्थिति देखी। पटाखा गोदाम ऐसी जगह पर बनाए गए थे जहां छोटे वाहन तक नहीं जा सकते थे। ऐसे में कभी दुर्घटना होने पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी का पहुंचना संभव ही नहीं है। इन गोदामों का हटना बहुत जरूरी था।

    पहुंच व रसूख का दिखा रहे थे इस्तेमाल

    पटाखा गोदाम के व्यवसायी लाइसेंस निरस्त होने के बावजूद पहुंच व रसूख का इस्तेमाल करते नजर आए। कई अधिकारियों से भी मिले लेकिन मामला न्यायालय में होने के चलते किसी ने भी इनकी नहीं सुनी। आखिरकार शहर को बारूद के ढेर से मुक्त कर दिया गया है।

    यहां थे पटाखा गोदाम

    कारखाना बाजार में नीरज कुमार, पंकज कुमार, सदर बाजार में हरिशंकर गुप्ता, पंत मार्केट किला बाजार विपिन कुमार, किला बाजार में संजय कुमार, पैठपड़ाव में अजय कुमार गुप्ता, मोहन लाल गुप्ता, कालाढूंगी चौराहे में संजय कुमार, सदर बाजार में राकेश कुमार गुप्ता, मुनगली गार्डन में आलोक कुमार और कुसुमखेड़ा में नीलकमल देवल की ओर से पटाखा गोदाम संचालित किए जा रहे थे।