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    फायर सीजन शुरू होने से पहले ही उत्तराखंड में 42 हेक्टेयर जंगल राख, 56 जगहों पर आग के मामले आए सामने

    Updated: Tue, 17 Feb 2026 01:01 PM (IST)

    उत्तराखंड में आधिकारिक फायर सीजन शुरू होते ही 42 हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं। पहले दो दिनों में 80 से अधिक फायर अलर्ट मिले। सर्दियों में कम बारिश के कार ...और पढ़ें

    पहले दिन 30 तो दूसरे दिन प्रदेश में मिले 50 से ज्यादा फायर अलर्ट

    पहले दिन 30 तो दूसरे दिन प्रदेश में मिले 50 से ज्यादा फायर अलर्ट

    HighLights

    1. फायर सीजन शुरू होने तक 42 हेक्टेयर जंगल जले।

    2. पहले दो दिनों में 80 से अधिक फायर अलर्ट मिले।

    3. सर्दियों में कम बारिश से जंगलों में नमी की कमी।

    जागरण संवाददाता, हल्द्वानी। प्रदेश में आधिकारिक रूप से फायर सीजन शुरू हो गया है। वन विभाग को पहले दो दिनों में ही प्रदेशभर में 80 से अधिक जगहों पर आग लगने के अलर्ट मिले हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस साल फायर सीजन की शुरुआत तक ही प्रदेशभर में 42 हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं। ऐसे में मानसून शुरू होने तक जंगलों को आग से बचाना वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती रहने वाला है।

    प्रदेश में हर वर्ष 15 फरवरी से 15 जून तक फायर सीजन माना जाता है। गर्मी बढ़ने के साथ ही जंगलों में आग की घटनाओं मं भी बढ़ोतरी होती है। वनाग्नि के लिहाज से वर्ष 2024 उत्तराखंड के लिए बदतर रहा था। 2024 में वनाग्नि के मामले में उत्तराखंड पहले पायदान में आ गया था। इसके बाद वनाग्नि रोकने के लिए कई कदम उठाए गए। लेकिन, अब भी वनाग्नि विभाग के लिए बड़ी चुनौती है।

    ऊपर से इस साल सर्दियों में बारिश और बर्फबारी कम हुई है, जिससे जंगलों में नमी कम है। वन विभाग के आंकड़ों की मानें तो नवंबर 2025 से अब तक प्रदेश में 54 जगहों पर आग लगी, जिनमें 42 हेक्टेयर से ज्यादा जंगल जले। नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच विभाग को वनाग्नि के 1957 फायर अलर्ट मिले, लेकिन विभाग ज्यादातर को गलत मानता है। उसका कहना है कि मौके पर महज 132 (6.75 प्रतिशत) वनाग्नि के अलर्ट ही सही मिले।

    पहले ही दिन अल्मोड़ा के लमगड़ा स्थित सिलखौड़ और हवालबाग में बज्यूड़ा के जंगलों में आग लगी। इसी तरह पूरे प्रदेश मे 80 से ज्यादा फायर अलर्ट आए, लेकिन वन विभाग ने इन्हें वनाग्नि नहीं माना। विभाग की वेबसाइट पर पहले दिन वनाग्नि का मामला किसी भी डिवीजन में दर्ज नहीं हुआ है।

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    इन सुझावों पर कब अमल करेगा विभाग
    वनाग्नि को रोकने के लिए विशेषज्ञ पूर्व में कई अहम सुझाव दे चुके हैं। पर्यावरणविद् अजय रावत ने सुझाव दिए थे कि होटल, रिजार्ट में बोन फायर और कैंप फायर पर प्रतिबंध लगे। जंगल की आग को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन नीति में शामिल किया जाए। वन विभाग में रेंजर और उससे ऊपर के अधिकारी लगातार वनों की निगरानी करें। फायर वाचरों को सम्मानजनक मानदेय समय पर मिले।

    डीएफओ वनों के हर कंपार्टमेंट की जानकारी पर आधारित डायरी अपने पास रखें। डीएफओ स्तर के अधिकारी ग्रामीणों के साथ संपर्क बढ़ाएं और वनाग्नि नियंत्रण के लिए जनचेतना को बढ़ाने की दिशा में गंभीरता से काम करें। इन सुझावों पर वन विभाग कब काम करेगा, यह बड़ा प्रश्न है।

    फायर अलर्ट मिलने पर टीम मौके पर जाती है। इनमें से कई फाल्ट अलर्ट होते हैं। वनाग्नि नियंत्रण के लिए विभाग पूरी तरह तैयार है। फायर वाचर की भर्तियां हो गई हैं।

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    - सुशांत पटनायक, मुख्य वन संरक्षर, आपदा एवं वनाग्नि प्रबंधन