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उत्तराखंड में 'मेड इन चाइना' से कटेगा दिल्ली का टिकट, 1500 मशीनों का एक महीने का किराया 6.85 लाख

Published: Fri, 30 Oct 2026 09:45 AM (IST)Updated: Sat, 31 Oct 2026 03:55 PM (IST)

उत्तराखंड रोडवेज ने 1500 नई ई-टिकट मशीनें मंगवाई हैं, जिन पर 'मेड इन चाइना' लिखा है, जिससे स्वदेशी उत्पादों के बहिष्कार की चर्चा के बीच बहस छिड़ गई है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

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संक्षेप में पढ़ें

गोविंद बिष्ट, हल्द्वानी। दीपावली के नजदीक आने पर स्वदेशी-विदेशी की चर्चा जोर पकड़ने लगती हैं। नेतानगरी से चाइनीज उत्पादों के बहिष्कार के सुर और तेज हो जाते हैं।

बातों पर अमल का जिम्मा जनता पर छोड़ दिया जाता है, लेकिन त्योहार से ठीक पहले उत्तराखंड रोडवेज में परिचालकों को जो ई-टिकट मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं। उसके पीछे साफ लिखा मेड इन चाइना, जिसे लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है।

सवाल के जवाब में परिवहन निगम के जीएम का कहना है कि पे-टीएम की तरफ से उपलब्ध कराई गई किराये की मशीनें भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) से सत्यापित हैं। इसलिए कोई दिक्कत नहीं। उत्तराखंड रोडवेज के बस बेड़े में 1200 से ज्यादा गाड़ियां हैं। एक दौर में परिचालकों को मैन्युअल तरीके से टिकट काटने पड़ते थे, लेकिन बाद में ई-टिकट मशीन ने इसकी जगह ले ली।

2022 में 1300 नई मशीनें विभाग में ली गई थीं, जिनमें से ज्यादातर खराब हो चुकी हैं। इसलिए प्रबंधन ने नई मशीनें लेने का निर्णय लिया। मुख्यालय के अनुसार हर डिपो में एक साथ सभी मशीनें बदली जाएंगी। सर्वे के बाद डेढ़ हजार मशीनें लेने का निर्णय लिया गया।

काठगोदाम डिपो में 140 और हल्द्वानी में 92 नई ई-टिकट मशीनें पहुंच भी चुकी हैं। दिल्ली, गुरुग्राम, जयपुर, लुधियाना, कानपुर, देहरादून से लेकर हर रूट पर इन्हीं का इस्तेमाल किया जाएगा। मशीन के पीछे पैक्स कंप्यूटर टेक्नोलाजी कंपनी लिमिटेड, मेड इन चाइना और शेनजेन शहर का नाम लिखा गया है। चीन के प्रमुख शहरों में शेनजेन भी शामिल है।

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एक महीने का किराया 6.85 लाख

रोडवेज ने डेढ़ हजार मशीनें मंगवाई हैं। नैनीताल, टनकपुर से लेकर देहरादून रीजन से जुड़े डिपो में ये पहुंचनी शुरू हो गई हैं। प्रति माह 457 रुपये के हिसाब से किराया चुकाना होगा। इस हिसाब से एक महीने का किराया 6.85 लाख पहुंच रहा है।

परिवहन निगम के अनुसार ई-टिकट मशीन के माध्यम से आनलाइन भुगतान में कोई दिक्कत नहीं आएगी। पुरानी मशीनों में अक्सर यह समस्या खड़ी हो जाती थी। कई बार यात्रियों और परिचालकों के बीच विवाद भी देखने को मिल चुका है। मगर अब यह दिक्कत नहीं आएगी, जैसे ही आनलाइन पैसा रोडवेज के खाते में पहुंचेगा, टिकट मशीन से बाहर निकल जाएगा।

ई-बसों की बैटरी भी चाइनीज मेड : जीएम

मामले को लेकर जीएम संचालन क्रांति सिंह का कहना था कि ई-टिकट मशीनों को लेकर सबसे अहम है भारतीय मानक ब्यूरो का सत्यापन। उसी आधार पर डेढ़ हजार मशीनों को किराये पर लिया गया है। किराया दर में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।

इलेक्ट्रिक बसों की बैटरी भी ज्यादातर चाइना मेड ही है। टिकट मशीन में बैटरी का खासा महत्व रहता है। पार्ट्स का बाहर से आयात किया जाता है। बस बीआइएस से प्रमाणित होना जरूरी है।

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