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    उत्तराखंड में वन्यजीव हमलों से दहशत, बाघ-गुलदार और हाथियों के हमलों में लगातार मौत

    Updated: Thu, 30 Apr 2026 12:44 PM (IST)

    तराई और कुमाऊं क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष गंभीर हो गया है, 2024-2026 के बीच बाघ, गुलदार और हाथियों के हमलों में 17 लोगों की जान गई है। ...और पढ़ें

    इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

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    प्रकाश जोशी, लालकुआं। तराई और कुमाऊं क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। वर्ष 2024 से 2026 के बीच सामने आए आंकड़े बताते हैं कि बाघ, गुलदार और हाथियों के हमलों में लगातार लोगों की जान जा रही है।

    जंगल से सटे इलाकों में हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग रोजमर्रा के काम भी भय के साए में करने को मजबूर हैं। इस अवधि में सबसे अधिक मौतें बाघ के हमलों में हुई हैं। विभिन्न वन प्रभागों में बाघ के हमलों में आठ लोगों की जान जा चुकी है। वहीं गुलदार के हमलों में दो लोगों की मौत दर्ज की गई है। जबकि तराई क्षेत्र में हाथियों का खतरा भी तेजी से बढ़ा है।

    वर्ष 2024 से अब तक हाथियों के हमलों में पांच लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक महिला घायल हुई है। इसके अलावा कालाढूंगी और किशनपुर रेंज में अन्य वन्यजीव हमलों में दो लोगों की मौत हुई है। इस तरह वर्ष 2024 से 2026 के बीच कुल मिलाकर कम से कम 17 लोगों की जान वन्यजीव हमलों में जा चुकी है, जो हालात की गंभीरता को दर्शाता है।

    बाघ के हमले

    • 2 जनवरी 2026: ढेला रेंज कार्बेट में सुमित्रा देवी की मौत
    • 4 जनवरी 2026: कोटा रेंज रामनगर में अभिमन्यु की मौत
    • 18 जनवरी 2026: कोसी रेंज रामनगर में अज्ञात व्यक्ति की मौत
    • 12 फरवरी 2026: फतेहपुर रेंज में गंगा देवी की मौत
    • 25 फरवरी 2026: फतेहपुर रेंज में कमला फर्त्याल की मौत
    • तीन अप्रैल 2026: मनोरा रेंज नैनीताल में हंसी देवी की मौत
    • 22 अप्रैल 2026: मनोरा रेंज नैनीताल में हेमा देवी की मौत
    • 23 अप्रैल 2026: फतेहपुर रेंज में कमल सिंह की मौत


    गुलदार के हमले

    • 11 जनवरी 2026: धारी ब्लाक में गंगा देवी की मौत
    • तीन फरवरी 2026: भीमताल जूनस्टेट में गंगा देवी की मौत

    हाथी के हमले

    • वर्ष 2024: टांडा रेंज पंतनगर-लालकुआं बाईपास में 32 वर्षीय युवक की मौत
    • 28 फरवरी 2026: टांडा जंगल में शकील व जाफर की मौत
    • 10 जनवरी 2026: टेड़ा गांव रामनगर में सीमा देवी घायल
    • 29 अप्रैल 2026: टांडा रेंज, शाह पठानी खत्ता में दो लोगों की मौत

    अन्य

    • तीन अप्रैल 2026: कालाढूंगी में भूपेंद्र सिंह बिष्ट की मौत
    • 25 अप्रैल 2026: किशनपुर रेंज में भालू के हमले में मोहम्मद आरिफ की मौत

    शव बिना प्रक्रिया के मोर्चरी पहुंचाए, परिजन परेशान

    लालकुआं: टांडा रेंज के शाह पठानी खत्ते में हाथी के हमले में मारे गए दो लोगों के मामले में वन विभाग, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि मृतक बांधो प्रजापति और एक अज्ञात व्यक्ति के शव को आवश्यक औपचारिकताएं पूरी किए बिना ही सीधे हल्द्वानी मोर्चरी ले जाया गया, जिसके चलते समय पर पोस्टमार्टम नहीं हो सका।

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    नियमानुसार शव को पहले सुशीला तिवारी चिकित्सालय में मृत घोषित कराना आवश्यक था। मृतक बांधो प्रजापति के परिजन दोपहर करीब दो बजे शव को ले जाने के लिए छोटा हाथी बुक कराकर पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए थे, लेकिन चिकित्सकीय औपचारिकताएं पूरी न होने के कारण प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। देर शाम तक इंतजार के बाद भी पोस्टमार्टम नहीं हुआ और परिजनों को बिना शव लिए लौटना पड़ा। ग्रामीणों ने पुलिस और वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है।

    यह लापरवाही है, यह चूक किस स्तर पर हुई, इसका पता लगाया जाएगा। ऐसे मामलों में चिकित्सकों को भी संवेदनशीलता के साथ कार्य करना चाहिए, ताकि पीड़ित परिवारों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। - अमित सैनी, पुलिस क्षेत्राधिकारी

    यदि शव पूरी प्रक्रिया के तहत लाए जाते तो उसी दिन पोस्टमार्टम हो सकता था। उन्होंने कहा कि बिना चिकित्सकीय पुष्टि के शव का पोस्टमार्टम नहीं किया जा सकता, क्योंकि कई मामलों में व्यक्ति कोमा की स्थिति में भी हो सकता है। उन्होंने बताया कि बांधो प्रजापति का पोस्टमार्टम गुरुवार को किया जाएगा, जबकि अज्ञात शव की शिनाख्त के लिए नियमानुसार तीन दिन का समय दिया जाता है। - डा. एके सिंह, फोरेंसिक विभाग, सुशीला तिवारी चिकित्सालय