ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना: सुरंगों में शुरू हुई डिजिटल केबलिंग, बनेगी आधुनिक रेल लाइन
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना अब डिजिटल अवसंरचना के महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर गई है, जहाँ सभी 16 सुरंगों में बिजली, संचार और हाई-स्पीड फाइबर आप्टि ...और पढ़ें

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना के तहत निर्मित सुरंग में बिछाई जाएगी केबिल। जागरण
HighLights
सभी 16 रेल सुरंगों में केबलिंग का कार्य शुरू
हाई-स्पीड फाइबर आप्टिक नेटवर्क स्थापित किया जा रहा है
परियोजना सुरक्षा, विश्वसनीयता और दक्षता बढ़ाएगी
विनय बहुगुणा, श्रीनगर गढ़वाल। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना ने अब डिजिटल अवसंरचना के सबसे अहम चरण में प्रवेश कर लिया है।
सभी 16 रेल सुरंगों की खोदाई पूरी होने और अधिकांश सिविल कार्य समाप्त होने के बाद अब सुरंगों में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बिजली, प्रकाश, हाई-स्पीड फाइबर आप्टिक नेटवर्क, संचार और सिग्नल प्रणाली की केबलिंग शुरू हो गई है।
रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) ने यह कार्य दो विशेषज्ञ कंपनियों को सौंपा है। परियोजना पूरी होने पर पूरी रेल लाइन रीयल-टाइम मानिटरिंग, सीसीटीवी निगरानी, ट्रेन नियंत्रण प्रणाली, आपातकालीन संचार और हाई-स्पीड डेटा नेटवर्क से संचालित होगी।
125 किलोमीटर लंबी ब्राडगेज ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना उत्तराखंड ही नहीं, देश की सबसे आधुनिक रेल परियोजनाओं में गिनी जा रही है।
इसका लगभग 119 किलोमीटर हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरता है और इसमें देश की सबसे लंबी 14.58 किलोमीटर की देवप्रयाग-जनासू रेल सुरंग भी शामिल है।
परियोजना का लगभग 80 प्रतिशत सिविल कार्य पूरा हो चुका है, जिसके बाद अब तकनीकी ढांचे को विकसित करने का काम तेजी से चल रहा है।
पहाड़ की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सुरंगों में बिजली, प्रकाश, इंटरनेट, संचार और सिग्नल प्रणाली के लिए अलग-अलग यूटिलिटी डक्ट तैयार किए हैं।
कंक्रीट लाइनिंग के भीतर बिजली, फाइबर आप्टिक और सिग्नल केबल अलग-अलग चेंबरों से गुजरेंगी, जबकि ट्रैक के दोनों ओर बने कंक्रीट केबल ट्रफ और दीवारों पर लगाए जा रहे जंगरोधी स्टील केबल ट्रे इन प्रणालियों को सुरक्षित बनाए रखेंगे।
अलग-अलग डक्ट होने से किसी एक प्रणाली में खराबी आने पर दूसरी सेवाएं प्रभावित नहीं होंगी और मरम्मत भी आसान होगी।
पूरी रेल लाइन पर हाई-स्पीड फाइबर आप्टिक नेटवर्क स्थापित किया जा रहा है। इसके माध्यम से रीयल-टाइम ट्रैक मानिटरिंग, सीसीटीवी निगरानी, ट्रेन संचालन नियंत्रण, आपातकालीन संचार तथा इंटरनेट सेवाओं का संचालन होगा। इससे रेल संचालन की सुरक्षा, विश्वसनीयता और दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
मशीनों से बिछ रही हैं 119 किलोमीटर सुरंगों की केबलें
करीब 119 किलोमीटर लंबी सुरंगों में केबल बिछाने के लिए केबल ड्रम, मोटराइज्ड विंच, केबल पुशर और रोलर सिस्टम जैसी आधुनिक मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। इनकी मदद से केबलों को एक छोर से दूसरे छोर तक खींचकर केबल ट्रे और ट्रफ में स्थायी रूप से स्थापित किया जा रहा है।
आग और नमी से पूरी तरह सुरक्षित रहेगा नेटवर्क
सुरंगों में आर्मर्ड, वाटरप्रूफ और फ्लेम-रिटार्डेंट लो-स्मोक (FRLS) केबलों का उपयोग किया जा रहा है। ये केबल आग लगने पर बेहद कम धुआं छोड़ती हैं तथा नमी और कठिन परिस्थितियों में भी सुरक्षित एवं प्रभावी ढंग से कार्य करती हैं।
रेल परियोजना की सभी सुरंगों में केबलिंग का कार्य शुरू हो चुका है। दो कंपनियां चरणबद्ध तरीके से यह काम कर रही हैं और आवश्यक सामग्री कार्यस्थलों तक पहुंचाई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार हो रहा यह नेटवर्क विषम परिस्थितियों में भी पूरे ट्रैक पर 24 घंटे निर्बाध संचार सुनिश्चित करेगा। आने वाले समय में यह परियोजना देश की डिजिटल धड़कन के रूप में पहचानी जाएगी।
-विनोद बिष्ट, परियोजना प्रबंधक, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, आरवीएनएल
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