ताबूत से लिपटकर रोती रही पत्नी, पिथौरागढ़ में सैन्य सम्मान के साथ किया बलिदानी विकास का अंतिम संस्कार
पिथौरागढ़ के गणकोट गांव निवासी लांस नायक विकास कुमार का पार्थिव शरीर पांच दिन बाद उनके पैतृक आवास पहुंचा। सिक्किम में हिमस्खलन में शहीद हुए विकास का अ ...और पढ़ें

पिथौरागढ़ के गणकोट गांव में बलिदानी पति विकास के देह से लिपटकर रोती पत्नी प्रीति।

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संवाद सहयोगी, पिथौरागढ़। जिला मुख्यालय के नजदीकी गणकोट (सुकौली) गांव निवासी बलिदानी विकास कुमार का पार्थिव शरीर पांचवे दिन उनके पैतृक आवास पहुंचा।
जहां बलिदानी के अंतिम दर्शन करने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। इसके बाद स्थानीय रामेश्वर घाट में सैन्य सम्मान के साथ बलिदानी का अंतिम संस्कार किया गया।
27 वर्षीय विकास कुमार भारतीय सेना की 19 कुमाऊं रेजीमेंट में सिक्किम में लांस नायक पद पर तैनात थे। बीते 29 मार्च को सीमा पर गश्त के दौरान वह हिमस्खलन की चपेट में आ गए, जिसमें उनका निधन हो गया।

शुक्रवार को पांचवे दिन बलिदानी जवान का पार्थिव देह सुबह ही दिल्ली से हवाई मार्ग के जरिए पिथौरागढ़ नैनी-सैनी एयरपोर्ट पहुंचा। जहां से सेना के वाहन से पार्थिव देह को उनके पैतृक आवास गणकोट लाया गया।
बलिदानी का देह गांव पहुंचते ही वातावरण गमगीन हो गया। ग्रामीणों ने नम आंखों से पुष्प वर्षा कर पार्थिव शरीर का स्वागत किया।

वहीं, पति का शरीर तिरंगा में लिपटा देखकर पत्नी बदहवास हो गई और मां का भी रो-रोकर बुरा हाल रहा। बलिदानी के पिता के आंखों से भी आंसूू नहीं थम रहे थे।
वहां मौजूद हर किसी के आंखों पर बस आंसू छलक रहे थे। हर कोई अपने-अपने तरीके से वीर सपूत को श्रद्धांजलि दे रहा था।
जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई ने भी बलिदानी के आवास पहुंचकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
जिलाधिकारी ने कहा कि बलिदान विकास कुमार का बलिदान देश की सेवा और सुरक्षा के प्रति उनकी अटूट निष्ठा का प्रतीक है। उनका यह सर्वोच्च बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति के लिए प्रेरित करता रहेगा।

उन्होंने शोक संतप्त स्वजन के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस दुख की घड़ी में पूरा प्रशासन उनके साथ खड़ा है।
नगर निगम महापौर कल्पना देवलाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विरेंद्र सिंह बोहरा, उपजिलाधिकारी जितेंद्र वर्मा सहित अधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पूर्व सैनिकों ने भी बलिदानी को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उन्हें नमन किया। आसपास के गांवों से भी हजारों की संख्या में लोग बलिदानी के अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे थे।

पत्नी बोली- इन्हें अस्पताल लेकर चलो
बलिदानी का पार्थिव शरीर जैसे ही उनके आंगन पर रखा गया तो पत्नी प्रीति बेसुध हो गईं और ताबूत से लिपटकर फूट फूटकर रोने लगीं।
इसके बाद अंतिम दर्शन के लिए जैसे ही ताबूत खोला गया तो बेसुध पत्नी अपना होश खो बैठीं और बार-बार यही कहती रहीं कि इन्हें अस्पताल लेकर चलो।
बलिदानी का पार्थिव शरीर घर पहुंचने से पहले भी पत्नी गांव के मार्ग में इंतजार में खड़ी रहीं। गांव के अन्य लोगों ने पत्नी को संभाला और उन्हें सांत्वना देते रहे। यह माहौल देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो गया।
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जब तक सूरज चांद रहेगा विकास तेरा नाम रहेगा से गूंजा क्षेत्र
गांव में अंतिम दर्शन के बाद बलिदानी की शव यात्रा करीब 40 किमी दूर रामेश्वर घाट के लिए निकली। बलिदानी का देह सेना के वाहन में रखा गया था।
उसके पीछे वाहनों का लंबा काफिला चल रहा था। पूरे मार्ग में लोग जब तक सूरज चांद रहेगा, विकास तेरा नाम रहेगा, विकास अमर रहे, भारत माता के जय के नारे लगाते रहे।
रामेश्वर घाट पहुंचने के बाद पूरे सैन्य सम्मान के साथ बलिदानी का अंतिम संस्कार किया गया। बलिदानी के बड़े भाई नीरज कुमार ने चिता को मुखाग्नि दी।

छोटे भाई के बलिदान पर गर्व, विकास के नाम से जाना जाए गांव
बड़े भाई नीरज ने कहा कि उन्हें अपने छोटे भाई के बलिदान पर गर्व है। कहा कि विकास का बचपन से ही देश सेना का सपना रहा था और उन्होंने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान भी दिया है।
उन्होंने कहा कि उनके गांव में विकास के नाम पर प्रवेश द्वार और विद्यालय का नाम रखा जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी उनके बलिदान को याद रख सके।
पुत्र के जन्मदिन पर आना था घर, तिरंगे से लिपटकर आया शव
विकास की वर्ष 2023 में प्रीति से शादी हुई थी। चार जून 2025 को उनका पुत्र हुआ था। जिसका नाम दंपती ने अपने नाम से जोड़ते हुए पृथ्विक रखा था। वह अभी दस माह का है।
दूधमुंहे नादान बालक को तो अभी पिता के बलिदान होने तक की भी कोई खबर नहीं है।
विकास आखिरी बार चार माह पूर्व दिसंबर माह में छुट्टी पर घर आए थे। उन्होंने बेटे के पहले जन्मदिन पर जून में फिर से घर आने का वादा किया था, लेकिन इससे पहले उनका तिरंगे से लिपटा शव घर आया।
पांच दिनों तक एक-एक पल गुजारना पड़ा भारी
लांस नायक विकास 29 मार्च को सिक्किम में बलिदान हुए थे। पार्थिव देह के लिए स्वजन को पांच दिन तक लंबा इंतजार करना पड़ा।
विकास के बलिदान की सूचना के बाद से उनके गांव में मातम पसरा हुआ है। इतने दिनों से माता-पिता, पत्नी व अन्य स्वजन के लिए एक-एक पल गुजारना भारी पड़ रहा था। गांव के अन्य ग्रामीण व रिश्तेदार किसी तरह से शोकाकुल परिवार को संभाल रहे हैं।
विकास वर्ष 2017 में सेना में भर्ती हुए थे। उनकी प्राथमिक शिक्षा गांव के सुकौली प्राथमिक विद्यालय व इंटरमीडिएट तक की शिक्षा केएनयू राइंका से हुई।
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