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Uttarakhand के इन नए ट्रेकिंग रूटों का इंतजार, पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

Published: Wed, 15 Jul 2026 11:29 AM (IST)

पिथौरागढ़ में लेकघाटी-चंडिकाघाट और छिपलाकेदार जैसे प्रस्तावित ट्रेकिंग रूट वर्षों से कागजों तक सीमित हैं, जिससे पर्यटन और स्थानीय रोजगार के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।

छिपलाकेदार, रूट विकसित होने से बढ़ेगा पर्यटन।

छिपलाकेदार, रूट विकसित होने से बढ़ेगा पर्यटन।

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संवाद सहयोगी, पिथौरागढ़। सीमांत जनपद पिथौरागढ़ ट्रेकिंग पर्यटन का बड़ा केंद्र बनने की क्षमता रखता है, लेकिन नए ट्रेकिंग रूटों के विकास की रफ्तार वर्षों से थमी हुई है।

जिले में हर साल बड़ी संख्या में देश-विदेश के ट्रेकर मिलम, रालम, पंचाचूली और नंदा देवी जैसे प्रसिद्ध ट्रेकों पर पहुंचते हैं।

इसके बावजूद निचले क्षेत्रों में प्रस्तावित ट्रेकिंग रूट आज भी धरातल पर नहीं उतर सके हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर पर्यटन को नई दिशा देने वाले इन ट्रेकिंग रूटों का निर्माण कब होगा।

विकसित होंगे नए पर्यटन स्थल 


जिले में लेकघाटी से चंडिका मंदिर तक करीब 10 किलोमीटर, बरम–कनार से छिपलाकेदार तक लगभग 20 किलोमीटर और जाराजीबली से छिपलाकेदार तक करीब 15 किलोमीटर लंबे ट्रेकिंग रूट विकसित करने की मांग लंबे समय से की जा रही है।

वन विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी समय-समय पर इन मार्गों का निरीक्षण भी कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। पर्यटन विशेषज्ञ सुरेंद्र पंवार का कहना है कि इन ट्रेकिंग रूटों के विकसित होने से जिले में ट्रेकर्स की संख्या बढ़ेगी और पर्यटन का दायरा उच्च हिमालयी क्षेत्रों से आगे निचली घाटियों तक पहुंचेगा

इससे नए पर्यटन स्थल विकसित होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इन मार्गों के बनने से लेकघाटी, बरम, कनार, जाराजीबली और आसपास के गांवों के युवाओं को गाइड, होमस्टे, परिवहन और स्थानीय उत्पादों के विपणन के माध्यम से रोजगार के अवसर मिलेंगे।

साथ ही ग्रामीण पर्यटन को भी नई पहचान मिलेगी। फिलहाल वर्षों से निरीक्षण, चर्चाओं और प्रस्तावों के बावजूद ट्रेकिंग रूटों का विकास शुरू नहीं हो सका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकार और संबंधित विभाग इस दिशा में गंभीरता से पहल करें तो पिथौरागढ़ ट्रेकिंग पर्यटन के क्षेत्र में देश के अग्रणी जिलों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।

क्यों जरूरी हैं नए ट्रेकिंग रूट

  • निचली घाटियों में पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
  • ट्रेकर्स को मिलेंगे नए और आसान ट्रेकिंग विकल्प
  • होमस्टे, गाइड और स्थानीय कारोबार को मिलेगा लाभ
  • ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे
  • सीमांत जिले के पर्यटन को मिलेगी नई पहचान

ट्रेकिंग रूटाें को विकसित करने के लिए कार्य योजना बनाई जाएगी। ट्रेकिंग गतिविधियां बढ़े इसलिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। - आशुतोष सिंह, डीएफओ पिथौरागढ़

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