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    केदारनाथ धाम में ड्रोन, CCTV और SOS सिस्टम से लैस हाईटेक सुरक्षा कवच, 300 से अधिक पुलिसकर्मी रहेंगे तैनात

    Updated: Mon, 13 Apr 2026 04:35 PM (IST)

    केदारनाथ यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए जिला प्रशासन ने हाई-टेक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। पूरे यात्रा मार्ग पर ड्रोन, लगभग 200 सीसीटीवी कैमरे औ ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. यात्रा मार्ग पर 200 सीसीटीवी कैमरे और 5 ड्रोन तैनात।

    2. यात्रियों की सुरक्षा हेतु 14 एसओएस प्वाइंट स्थापित किए गए।

    3. 300 से अधिक पुलिसकर्मी भीड़ और कानून व्यवस्था संभालेंगे।

    बृजेश भट्ट, रुद्रप्रयाग। आगामी केदारनाथ धाम यात्रा को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनाने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस ने इस बार अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए हैं। यात्रा के दौरान हर गतिविधि पर कड़ी और तकनीकी निगरानी रहेगी।

    हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था के तहत ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे, एसओएस प्वाइंट और कंट्रोल रूम के जरिए पूरे यात्रा मार्ग को निगरानी में लिया गया है। साथ ही केदारनाथ पैदल मार्ग पर यात्रा के दौरान बच्चों व बुजर्गो के परिजनों से बिछुडने के कई मामले सामने आते हैँ, कैमरे लगने से बिछुडे लोगों को खोजने में भी आसानी होगी।

    रुद्रप्रयाग से केदारनाथ धाम तक पूरे यात्रा रूट पर तीसरी नजर यानी हाई-रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है। प्रशासन द्वारा लगभग 200 कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे यात्रा मार्ग, मुख्य बाजारों, संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों और हेलीपैड तक हर हलचल को रिकॉर्ड कर रहे हैं।

    गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक पैदल मार्ग पर भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। यहां 16 सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गए हैं, जिससे ट्रैक पर चलने वाले यात्रियों की निगरानी की जा सके। इसके अलावा 14 एसओएस प्वाइंट बनाए गए हैं, जिनमें से 5 प्रमुख केंद्र गौरीकुंड, जंगलचट्टी, भीमबली, लिनचोली और रुद्रा प्वाइंट पर स्थापित हैं। शेष 11 एसओएस केंद्र रुद्रप्रयाग से गौरीकुंड के बीच महत्वपूर्ण स्थानों पर बनाए गए हैं।

    इन एसओएस केंद्रों की खासियत यह है कि नेटवर्क न होने की स्थिति में भी यात्री सीधे जिला मुख्यालय स्थित आपदा कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकते हैं। इससे जरूरतमंद व्यक्ति की रियल टाइम लोकेशन ट्रेस कर त्वरित राहत और बचाव कार्य संभव हो सकेगा।

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    यात्रा के दौरान ट्रैफिक और भीड़ प्रबंधन पर भी विशेष फोकस रखा गया है। केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगे कैमरों के माध्यम से पुलिस जाम और भीड़ की स्थिति पर नजर रखेगी और आवश्यकता अनुसार तत्काल निर्णय लेकर व्यवस्था को सुचारू बनाएगी।

    सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए इस बार 300 से अधिक पुलिसकर्मी गौरीकुंड, सोनप्रयाग से लेकर केदारनाथ धाम तक तैनात किए जाएंगे। ये जवान भीड़ नियंत्रण, कानून व्यवस्था और आपात स्थितियों से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद रहेंगे।

    इसके साथ ही जिला आपदा कंट्रोल रूम को 24 घंटे सक्रिय रखा जाएगा, जहां पांच कर्मियों की टीम लगातार निगरानी करेगी और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देगी।

    आधुनिक तकनीक के उपयोग को और बढ़ाते हुए प्रशासन 5 ड्रोन कैमरों से भी निगरानी करेगा। वहीं यात्रा मार्ग पर संचालित लगभग 5 हजार घोड़ा-खच्चरों पर बारकोड, टोकन और चिप लगाई जा रही है, जिससे उनकी गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सके। इन व्यापक व्यवस्थाओं से जहां कानून व्यवस्था मजबूत होगी, वहीं अक्सर होने वाली श्रद्धालुओं के बिछड़ने की समस्या का भी समाधान होगा।

    कैमरों और तकनीक की मदद से ऐसे लोगों को जल्दी खोजकर उनके परिजनों से मिलाया जा सकेगा। प्रशासन का लक्ष्य है कि इस बार श्रद्धालुओं को सुरक्षित, व्यवस्थित और यादगार यात्रा अनुभव प्रदान किया जाए।

    जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी एनएस रजवान ने बताया कि केदारनाथ धाम से लेकर गौरीकुंड तक लगाए गए कैमरों से यात्रा व्यवस्थाओ के साथ ही सुरक्षा व्यवस्था पर पैनी नजर रखी जाएगी।