नेपाल की बाढ़ से केदारनाथ और धराली आपदा की भयावह यादें ताजा, 6 हजार से अधिक लोगों की हुई थी मौत
नेपाल में आई बाढ़ ने 2013 की केदारनाथ आपदा और 2025 की धराली आपदा की यादें ताजा कर दी हैं, ...और पढ़ें
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नेपाल में बाढ़ से तबाही। फोटो जागरण
HighLights
नेपाल बाढ़ ने केदारनाथ आपदा की याद दिलाई।
2013 में केदारनाथ में 6000 से अधिक मौतें।
धराली में 2025 में खीरगंगा नदी से तबाही।
जागरण संवाददाता, रुद्रप्रयाग। नेपाल में आए सैलाब से हुई तबाही ने फिर 16-17 जून 2013 की विनाशकारी केदारनाथ आपदा की याद ताजा कर दी है। तब चौराबाड़ी ताल के टूटने से आए सैलाब ने केदारपुरी को तबाह कर दिया था और कल्पना करना भी मुश्किल था कि केदारनाथ यात्रा फिर से पुराने स्वरूप में लौट पाएगी।
पांच अगस्त 2025 को उत्तरकाशी जिले में खीरगंगा नदी में एकाएक सैलाब आने से गंगोत्री हाईवे किनारे बसा धराली कस्बा मलबे के ढेर में तब्दील हो गया था। विनाशकारी बाढ़ ने देश-दुनिया को झकझोर कर रख दिया था।
केदारनाथ में चौराबाड़ी ग्लेशियर की झील फटने के बाद हर ओर तबाही का मंजर था। केदारनाथ मंदिर को छोड़कर बाकी पूरी केदारपुरी मलबे में तब्दील हो गई थी। आपदा में छह हजार लोगों की मौत हो गई थी। रुद्रप्रयाग के अगस्त्यमुनि व पौड़ी के श्रीनगर में भी अलकनंदा नदी में आए सैलाब में भारी नुकसान पहुंचाया था। केदारनाथ में 16 जून की रात धाम में अंधेरा हो गया।
ऐसा लगा कि बिजली गुल हो गई है, लेकिन रात 11 बजे तक जिला प्रशासन को जब जानकारी मिली कि केदारपुरी सैलाब की चपेट में है तो अफरा-तफरी मच गई। महीनों तक केदारनाथ मंदिर के चारों ओर मलबा ही मलबा रहा। केंद्र सरकार की मदद से युद्ध स्तर पर राहत-बचाव अभियान चला। इसके बाद केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण का काम शुरू हुआ।
उत्तरकाशी के धराली में एक साल पहले आया था सैलाब
पांच अगस्त 2025 को उत्तरकाशी जिले में खीरगंगा नदी में अचानक सैलाब से धराली कस्बा मलबे के ढेर में तब्दील हो गया था। इस आपदा में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। 52 लोग लापता हुए थे। इनमें से अब तक 20 लोगों को मृतक घोषित किया गया है।
आज भी धराली आपदा के जख्मों को मलबे की चादर में समेटे खामोश नजर आता है। धराली की खामोशी और उसके जख्मों की गहराई को आज भी महसूस किया जा सकता है।
आपदा के बाद मृत मिले चार शवों की डीएनए सैंपलिंग से पहचान की गई, इसमें धराली का एक स्थानीय युवक तथा तीन सेना के जवान शामिल थे। हर्षिल व धराली में कुल 116 व्यावसायिक होटल व दुकानें आपदा की जद में आए थे।
