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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 03, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कांग्रेस के बड़े नेताओं को दिखाई कार्यकर्ताओं ने जमीन

By BhanuEdited By:
Updated: Thu, 04 May 2017 04:04 AM (IST)

विधानसभा चुनाव में करारी हार का ठीकरा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेताओं पर फोड़ा है।

कांग्रेस के बड़े नेताओं को दिखाई कार्यकर्ताओं ने जमीन
कांग्रेस के बड़े नेताओं को दिखाई कार्यकर्ताओं ने जमीन

नई टिहरी, [जेएनएन]: विधानसभा चुनाव में करारी हार का ठीकरा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेताओं पर फोड़ा है। नई टिहरी में कांग्रेस की समीक्षा बैठक में कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय सहित अन्य बड़े नेताओं की उपस्थिति में साफ कहा कि मुख्यमंत्री बीजापुर आवास और प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में बैठे बड़े नेताओं की वजह से ही कांग्रेस की हार हुई है। इस दौरान बैठक में कई बार कार्यकर्ताओं ने हंगामा भी किया। 

नई टिहरी के बहुउद्देश्यीय हॉल में विधानसभा चुनाव के कारणों को जानने के लिए कांग्रेस की समीक्षा बैठक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय की उपस्थिति में संपन्न हुई। बैठक हंगामेदार रही और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष व अन्य बड़े नेताओं के सामने जमकर भड़ास निकाली। 

कार्यकर्ताओं ने कहा कि चुनाव में मुख्यमंत्री के दरबार और प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में बैठे नेताओं के कारण हार हुई है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूरा जोर लगाया लेकिन कांग्रेस के बड़े नेता हवा में उड़ते रहे। देहरादून में जाने पर किसी कार्यकर्ता का सम्मान नहीं होता है और बड़े नेता अपना खूब सम्मान कराते हैं। 

बैठक में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा कि चुनाव के परिणामों की किसी ने कल्पना नहीं की थी। अब कार्यकर्ता इस हार को भुलाकर आने वाले चुनाव की तैयारी में जुट जाएं। पंचायत चुनाव, निकाय चुनाव और लोकसभा चुनाव के लिए अभी से तैयारी कर लें। बैठक में राज्य आंदोलन परिषद उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप, प्रदेश उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट, पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी, भीमलाल आर्य, बलबीर सिंह नेगी, जिलाध्यक्ष सूरज राणा, विक्रम पंवार, हिमांशु विजल्वाण, नरेंद्र रमोला आदि मौजूद रहे। 

प्रदेश उपाध्यक्ष को किया अनसुना 

बैठक के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बात सुनकर प्रदेश उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट ने उन्हें चुप कराने का प्रयास किया, लेकिन कार्यकर्ता शांत नहीं हुए और उनकी बात अनुसनी कर दी। कार्यकर्ताओं के तेवर देख प्रदेश उपाध्यक्ष भी खामोश हो गए। इस दौरान कई बार हंगामे की स्थिति बनी। 

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