प्रथम विश्व युद्ध में जर्मन सेना से लड़ते हुए गबर सिंह नेगी ने दिखाया था अदम्य साहस, बलिदान दिवस पर किया याद
प्रथम विश्वयुद्ध के नायक और विक्टोरिया क्रॉस विजेता गबर सिंह नेगी को उनके बलिदान दिवस, 10 मार्च को टिहरी के चंबा स्थित स्मारक पर श्रद्धांजलि दी गई। ...और पढ़ें

वीसी गबर सिंह नेगी के शहादत दिवस पर चंबा स्थित उनके स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करते सेना के जवान व नागरिक। जागरण

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संवाद सूत्र, चंबा (टिहरी)। प्रथम विश्वयुद्ध की भीषण रणभूमि में गढ़वाल के वीर सपूत गबर सिंह नेगी ने अदम्य साहस का ऐसा परिचय दिया कि जर्मन सेना में खलबली मच गई।
दुश्मनों का डटकर मुकाबला करते हुए वह आज ही के दिन 10 मार्च 1915 को वीरगति को प्राप्त हुए। अदम्य वीरता और साहस से अंग्रेज इतने प्रभावित हुए मरणोपरांत उन्हें प्रतिष्ठित विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित किया।
प्रथम विश्व युद्ध के नायक विक्टोरिया क्रास (वीसी) विजेता गबर सिंह नेगी के मंगलवार को बलिदान दिवस पर गढ़वाल राइफल के जवानों व पूर्व सैनिकों ने टिहरी जनपद के चंबा में स्थित उनके स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
इसके अलावा सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने भी उनका भावपूर्ण स्मरण किया।
मंगलवार को गबर सिंह नेगी के बलिदान दिवस पर चंबा के वीसी गब्बर सिंह चौक पर स्थित उनके स्मारक पर द्वितीय गढ़वाल राइफल के सूबेदार राजेंद्र सिंह गुसाई के नेतृत्व में जवानों ने पुष्पचक्र चढ़ाकर सलामी दी।
उन्होंने कहा कि वीसी गबर सिंह के अदम्य साहस को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। युवा पीढ़ी को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर देश सेवा के लिए आगे आना चाहिए।
श्रद्धासुमन अर्पित करने वालों में पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष संजय रावत, व्यापार सभा अध्यक्ष बलवीर सिंह पुंडीर, महिपाल सजवाण, कृष्णा प्रसाद महंगाई, शंकर कोठारी, कैप्टन आनंद सिंह नेगी, इंद्र सिंह नेगी, कमल सिंह नेगी, कमांडेंट सब्बल सिंह पुंडीर, सूबेदार अनिल पुंडीर आदि मौजूद रहे।
बता दें कि उत्तराखंड के टिहरी जनपद चंबा ब्लाक के मज्यूड़ गांव निवासी गबर सिंह नेगी का जन्म 21 अप्रैल 1895 को हुआ था। वह छह अक्टूबर 1913 में द्वितीय गढ़वाल राइफल्स में भर्ती हुए।
वर्ष 1914 में प्रथम विश्वयुद्ध हुआ तो ब्रिटिश सेना की ओर से उनकी बटालियन को इस युद्ध में जर्मन सेना के खिलाफ लड़ने के लिए भेजा गया, जिसकी कमान गबर सिंह नेगी को सौंपी गई।
उन्होंने शौर्य और पराक्रम से लड़ते हुए जर्मन सेना में खलबली मचा दी और उनके सैकड़ों सैनिकों को मार गिराया। साथ ही जर्मन सेना के 350 सैनिकों व अफसरों को बंदी बना दिया। लेकिन इस युद्ध में बहादुरी से लड़ते हुए 10 मार्च 1915 को वह वीरगति को प्राप्त हो गए।