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किसानों के लिए कमाई का नया जरिया, उत्तराखंड में भी महकेगा जापान का मियाजाकी आम

Published: Sun, 04 Oct 2026 01:49 PM (IST)

जापान का प्रसिद्ध मियाजाकी आम अब उत्तराखंड के किसानों के लिए आय का नया स्रोत बन सकता है, जिसकी खेती ...और पढ़ें

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राजेश मिश्रा, पंतनगर। जापान के मियाजाकी क्षेत्र का मशहूर प्रीमियम आम अब उत्तराखंड के किसानों के बीच भी आकर्षण का केंद्र बन रहा है। गहरे लाल रंग, मुलायम व कम रेशेदार गूदे, तेज सुगंध और अधिक मिठास के कारण पहचान बनाने वाला यह आम तराई क्षेत्र के किसानों के लिए अतिरिक्त आय का विकल्प बन सकता है।

पंतनगर में चल रहे 120वें अखिल भारतीय किसान मेले में कमल नर्सरी, किच्छा के योगेंद्र बड़ी मात्रा में मियाजाकी आम के पौधे बिक्री के लिए लेकर पहुंचे हैं। पौधों को देखने और इसकी खेती की जानकारी लेने के लिए किसानों में जबरदस्त उत्सुकता दिख रही है।

पंतनगर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डा. अजय प्रभाकर ने बताया कि मियाजाकी जैसे प्रीमियम आम की खेती से किसानों को अच्छी आय का अवसर मिल सकता है, लेकिन केवल बाजार में इसकी ऊंची कीमत देखकर बड़े क्षेत्र में पौधे लगाना उचित नहीं होगा। किसानों को पहले इसकी जलवायु जरूरत, सिंचाई, छंटाई, रोग-कीट प्रबंधन, फल सुरक्षा और बाजार की मांग को समझना चाहिए। स्थानीय परिस्थितियों में इसका परीक्षण करने के बाद ही बड़े स्तर पर खेती करना बेहतर होगा।

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मियाजाकी अलग प्रजाति नहीं, इरविन किस्म से जुड़ा आम

पंतनगर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डा. अजय प्रभाकर का कहना है कि मियाजाकी आम अलग प्रजाति नहीं है। मियाजाकी में मुख्य रूप से ‘इरविन’ किस्म के आम को विशेष तकनीक और गुणवत्ता मानकों के साथ तैयार किया जाता है। इरविन मूल रूप से फ्लोरिडा की किस्म है और लाल छिलके वाले आम के रूप में दुनिया के कई हिस्सों में उगाई जाती है।

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मियाजाकी का वजन कम से कम 350 ग्राम, मिठास 15 डिग्री ब्रिक्स या अधिक और आकर्षक लाल रंग जैसे मानक निर्धारित हैं। जापान में फल को पेड़ पर पकने दिया जाता है और विशेष जाल में गिरने पर उसकी तुड़ाई की जाती है, जिससे फल को नुकसान कम होता है।

अन्य आम से इस तरह खास है मियाजाकी

पंतनगर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डा. अजय प्रभाकर कहते हैं कि देश में दशहरी, लंगड़ा, चौसा, आम्रपाली, मल्लिका, केसर और अन्य कई किस्में पहले से किसानों के बीच प्रचलित हैं। मियाजाकी की प्रमुख विशेषता उसकी लाल त्वचा, कम रेशे वाला मुलायम गूदा, तेज सुगंध और अपेक्षाकृत अधिक मिठास है। हालांकि इसे पोषण की दृष्टि से पूरी तरह अलग फल मानना सही नहीं होगा। आम में सामान्य रूप से बीटा-कैरोटीन, फोलेट और एंटीआक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं।

मियाजाकी की विशिष्टता मुख्य रूप से स्वाद, रंग, बनावट और प्रीमियम गुणवत्ता में है, न कि किसी ऐसे अतिरिक्त पोषक तत्व में जो सामान्य आमों में बिल्कुल नहीं पाया जाता।

एक एकड़ में कितने पौधे, कितना उत्पादन

मियाजाकी के लिए उत्तराखंड की परिस्थितियों में विश्वविद्यालय स्तर पर प्रमाणित एकड़वार उत्पादन आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। रोपण में नियमानुसार 10×10 मीटर की दूरी पर एक एकड़ में करीब 40 पौधे लगने चाहिए। अधिक सघन रोपण में इनकी संख्या बढ़ सकती है। इरविन आम पर जापान में किए गए एक अध्ययन में नियंत्रित परिस्थितियों में उत्पादन बढ़ा है। इसे उत्तराखंड के खुले खेत में सीधे लागू नहीं किया जा सकता।

उत्पादन में भी है बड़ा अंतर

सामान्य आम की खेती में किसान अक्सर अधिक फल उत्पादन और स्थानीय बाजार को ध्यान में रखते हैं, जबकि मियाजाकी मॉडल में लक्ष्य सीमित संख्या में उच्च गुणवत्ता वाले फल तैयार करना है। मियाजाकी की जापानी उत्पादन पद्धति में बेहतर रंग, आकार और मिठास वाले फलों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

कई फलों को हटाकर चुनिंदा फलों को विकसित करने तथा जाल में पकाने जैसी तकनीक अपनाई जाती है। फल देने की अवधि भी पौधे की उम्र और रोपण सामग्री पर निर्भर करेगी। ग्राफ्टेड आम सामान्यतः बीज से तैयार पेड़ों की तुलना में जल्दी फल देना शुरू करते हैं, लेकिन मियाजाकी के लिए उत्तराखंड में फलन की निश्चित अवधि स्थानीय परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

मेंटेनेंस में भी चाहिए अतिरिक्त ध्यान

मियाजाकी की खेती सामान्य आम की तुलना में पौधा लगाने तक सीमित नहीं है। जापान में प्रीमियम उत्पादन के दौरान फल को धूप और पेड़ पर पकने की प्रक्रिया के अनुसार विशेष तरीके से प्रबंधित किया जाता है तथा पकने पर फल को जाल में सुरक्षित किया जाता है। उत्तराखंड में फूल आने के समय बारिश, अधिक नमी और पाला उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में तराई के अपेक्षाकृत गर्म और पाले से सुरक्षित क्षेत्रों में छोटे स्तर पर परीक्षण करना अधिक व्यावहारिक होगा।

एक एकड़ में उत्पादन का दावा अभी जल्दबाजी

मियाजाकी की उत्तराखंड में व्यावसायिक खेती को लेकर एकड़वार प्रमाणित उत्पादन आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं। जापान में इरविन आम पर नियंत्रित परिस्थितियों में किए गए अध्ययन में उम्र के साथ प्रति पेड़ उत्पादन बढ़ता पाया गया, लेकिन इन आंकड़ों को उत्तराखंड के खुले खेत में सीधे लागू नहीं किया जा सकता। इसलिए किसानों को पौधों की संख्या और संभावित उत्पादन का निर्धारण स्थानीय परीक्षण, पौध की गुणवत्ता, दूरी, मिट्टी और प्रबंधन के आधार पर करना चाहिए।

मियाजाकी की असली खासियत क्या?

मियाजाकी को अलग प्रजाति के बजाय मुख्यतः इरविन किस्म से जुड़े प्रीमियम उत्पादन के रूप में समझना चाहिए। इसकी पहचान लाल रंग, कम रेशे वाले मुलायम गूदे, तेज सुगंध और अधिक मिठास से है। ‘ताइयो नो तामागो’ प्रीमियम ग्रेड के लिए 350 ग्राम या अधिक वजन और कम से कम 15 डिग्री ब्रिक्स मिठास जैसे मानक हैं।

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