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    आरटीई एडमिशन में फर्जीवाड़ा: मोबाइल शोरूम और कार... फिर भी बनवाया 54 हजार सालाना आय का सर्टिफिकेट

    Updated: Thu, 09 Jul 2026 12:25 PM (IST)

    रुद्रपुर में मोबाइल शोरूम मालिक ने फर्जी आय प्रमाण पत्र के आधार पर आरटीई प्रवेश लिया, जिसे जांच के बाद रद्द कर दिया गया। ...और पढ़ें

    इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

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    जागरण संवाददाता, रुद्रपुर । आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए बनी शिक्षा का अधिकार योजना में कथित फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आ गया है। मोबाइल शोरूम और निजी चारपहिया वाहन होने के बावजूद सिर्फ 54 हजार रुपये वार्षिक आय दर्शाकर आय प्रमाण पत्र बनवाने और उसी के आधार पर निजी स्कूल में आरटीई के तहत प्रवेश लेने का मामला उजागर हो गया।

    दैनिक जागरण में खबर प्रकाशित होने के बाद शिक्षा विभाग ने जांच कराई। तहसीलदार की जांच में आय प्रमाण पत्र गलत तथ्यों के आधार पर जारी पाया गया, जिसके बाद बुधवार को शिक्षा विभाग ने संबंधित छात्र का आरटीई प्रवेश भी रद कर दिया गया। अब उस सीट पर जरूरतमंद बच्चे को प्रवेश दिया जाएगा।

    आय प्रमाण पत्र की जांच

    खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने 14 मई 2026 को तहसीलदार रुद्रपुर को पत्र भेजकर नवल कुमार अरोरा के आय प्रमाण पत्र की जांच का अनुरोध किया था। पत्र में उल्लेख किया गया था कि संबंधित व्यक्ति के नाम से मोबाइल ट्रेंड्ज नामक मोबाइल शोरूम संचालित है तथा उनके पास निजी चारपहिया वाहन भी है।

    इसके बावजूद आरटीई प्रवेश के लिए जारी आय प्रमाण पत्र में परिवार की वार्षिक आय मात्र 54 हजार रुपये दर्शाई गई थी। तहसीलदार की जांच में आय प्रमाण पत्र गलत तथ्यों के आधार पर जारी होना सामने आया। जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने आय प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया, जिसके बाद खंड शिक्षा अधिकारी सावेद आलम ने आरटीई के तहत दिया गया प्रवेश भी समाप्त कर दिया।

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    खंड शिक्षा अधिकारी सावेद आलम का कहना है कि आरटीई का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। फर्जी दस्तावेजों के जरिए योजना का लाभ लेने वालों के खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि निरस्त हुई सीट पर अब वास्तविक पात्र बच्चे को प्रवेश दिलाया जाएगा।

    एक महीने बाद भी गदरपुर के 12 आवेदनों की जांच ठंडे बस्ते में

    आरटीई प्रवेश में फर्जी आय प्रमाण पत्र के मामले के बीच गदरपुर क्षेत्र के 12 संदिग्ध आवेदनों की जांच अब तक पूरी नहीं हो सकी है। इन आवेदनों से जुड़े दस्तावेज संबंधित विभाग को एक महीने से अधिक पहले भेजे जा चुके हैं, लेकिन अभी तक उनकी जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है।

    जांच में हो रही देरी से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर संदिग्ध मामलों के सत्यापन में इतना समय क्यों लग रहा है। यदि समय रहते जांच पूरी होती तो अपात्र लाभार्थियों पर पहले ही कार्रवाई हो सकती थी।

    शिमला पिस्तौर के पूर्व प्रधान पर चल रही जांच का इंतजार

    आरटीई में फर्जी आय प्रमाण पत्र के मामले में एक के बाद एक कार्रवाई सामने आई। इसी में शिमला पिस्तौर के पूर्व प्रधान के विरुद्ध भी जांच शामिल है। लेकिन इस मामले में भी अब तक कोई निर्णय नहीं हो सका है। आरोप है कि संबंधित प्रकरण में जांच के लिए दस्तावेज काफी पहले उपलब्ध करा दिए गए थे, लेकिन आवेदन अब तक निरस्त नहीं किया गया। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब अन्य मामलों में कार्रवाई हो चुकी है, तो इस मामले में देरी क्यों हो रही है।