यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 13, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बाबा नीम करौरी की अद्भुत आस्था, कोई व्हील चेयर तो कोई बैसाखी के सहारे पहुंच रहा कैंची धाम
बाबा नीम करौरी के प्रति अटूट आस्था का ही नतीजा है कि भक्त दूर-दूर से कैंची धाम पहुंच रहे हैं। ...और पढ़ें

HighLights
- हर मुश्किल को हराकर मजबूत हौसलों से पहुंचे बाबा के धाम
- व्हील चेयर व बैसाखी के सहारे टेका बाबा के दर मत्था
- प्रयागराज से पहुंचे अखिलेश तो राजस्थान से मुकेश
संवाद सूत्र, जागरण गरमपानी। बाबा के प्रति अगाध श्रद्धा व विश्वास ही जो सैकड़ों किलोमीटर दूर से बाबा भक्त कैंची धाम पहुंच रहे हैं। गंभीर बिमारी से जूझने के बावजूद कुछ श्रद्धालु ऐसे हैं की वो कैंची धाम पहुंचकर बाबा के दर पर शीश झुकाने पहुंच रहे हैं।
अल्मोड़ा हल्द्वानी हाईवे पर स्थित सुप्रसिद्ध कैंची धाम वाले बाबा नीम करौरी की महिमा अपरंपार है। देश विदेश से कैंची धाम पहुंचने वाले भक्त सिर्फ और सिर्फ बाबा के दर पर शीश झुकाने को आतुर हैं। सैकड़ों किलोमीटर दूर से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में बाबा के प्रति अगाध आस्था है।
छोटे छोटे बच्चों व बुजुर्ग स्वजनों को लेकर पहुंचने वाले लोग उत्तराखंड पहुंचकर बाबा नीम करौरी के कैंची धाम पहुंचना नहीं भूलते। लंबे समय से नसों की बिमारी से जूझ रहे राजस्थान निवासी कारोबारी मुकेश अग्रवाल व्हीलचेयर पर ही जिंदगी बीता रहे हैं।
अमेरिका तक में उपचार कराने के बाद भी जब स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ तो इस वर्ष स्थापना दिवस पर मुकेश बाबा के दर पर शीश झुकाने पहुंचे हैं। वहीं प्रयागराज से अखिलेश पांडे भी कैंची धाम पहुंचे हैं।
बैसाखी के सहारे बाबा के दर पर मत्था टेकने पहुंचे अखिलेश में भी गजब का उत्साह है। कहते हैं की नीम करौरी के दरबार पहुंचकर जिंदगी सफल हो गई है अखिलेश के अनुसार अब वह प्रत्येक वर्ष कैंची धाम आएंगे।
