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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 02, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    भूगोल के शिक्षक ने बंजर भूमि पर उगा दिया जंगल

    By Sunil NegiEdited By:
    Updated: Mon, 03 Apr 2017 05:04 AM (IST)

    उत्‍तरकाशी जिले के राजकीय इंटर कॉलेज बर्निगाड परिसर के निकट 50 नाली सूखी-बंजर भूमि पर कॉलेज के भूगोल शिक्षक ने जंगल उगा दिया है। ...और पढ़ें

    भूगोल के शिक्षक ने बंजर भूमि पर उगा दिया जंगल
    भूगोल के शिक्षक ने बंजर भूमि पर उगा दिया जंगल

    उत्‍तरकाशी, [शैलेंद्र गोदियाल]: जिले के राजकीय इंटर कॉलेज बर्निगाड परिसर के निकट 50 नाली सूखी-बंजर भूमि पर कॉलेज के भूगोल शिक्षक सोबेंद्र सिंह की मेहनत हरियाली के रूप में लहलहा रही है। इस भूमि पर 119 प्रजातियों के 2500 से अधिक पेड़-पौधे और 130 प्रजातियों के फूल मुस्कान बिखेरते नजर आते हैं। प्रतीत होता है, जैसे धरती का दुल्हन के रूप में श्रृंगार किया गया हो। सोबेंद्र की यह मुहिम यहीं नहीं थमी। अब वे आसपास के गांवों में खाली और बंजर पड़ी भूमि पर ग्रामीणों के सहयोग से जंगल खड़ा करने में जुटे हुए हैं।

    जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से 105 किलोमीटर दूर स्थित इस कॉलेज में वर्ष 1996 में बतौर भूगोल शिक्षक सोबेंद्र सिंह की तैनाती हुई थी। पर्यावरण प्रेम और कुछ अलग कर दिखाने की चाह के चलते सोबेंद्र ने फरवरी 1997 में विद्यालय परिसर समेत आसपास की बंजर भूमि पर पौध रोपण शुरू किया। धीरे-धीरे मुहिम आगे बढ़ती गई और 1200 वर्गमीटर क्षेत्रफल में शुरू किया गया पौध रोपण का कार्य 50 नाली क्षेत्रफल में फैल गया। 

    वर्तमान में यहां 119 प्रजातियों के 2500 से भी अधिक पेड़-पौधे लहलहा रहे हैं। जबकि, विद्यालय परिसर में लगे 130 प्रजातियों के फूल अपनी खुशबू से वातावरण को महका रहे हैं। इस जंगल को तैयार करने में सोबेंद्र को 20 साल का समय लगा।

    जंगल को खाद-पानी देने के लिये वहां छह पिट जैविक खाद और छह चाल-खाल भी बनाये गये हैं। इससे जंगल में कभी खाद-पानी की दिक्कत नहीं होती। इतना ही नहीं, अब सोबेंद्र ने विद्यालय के निकट सिंगुणी और जर्डा गांव में इसी तरह का जंगल तैयार करने की मुहिम शुरू कर दी है। सोबेंद्र बताते हैं कि सिंगुणी गांव में जुलाई 2016 में पौधरोपण किया गया था। इस बार जुलाई में फिर पौधे रोपे जायेंगे। जर्डा गांव में भी पौधे लगाने के लिए 500 गड्ढे खोदे गए हैं। कहते हैं, अब उनका एकमात्र ध्येय दोनों गांवों के लिए जंगल तैयार करना है।

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    सोबेंद्र के जंगल में प्रमुख पेड़

    रुद्राक्ष, बरगद, पीपल, रबड़, भीमल, जामुन, लीची, बबलू, कपास, नीम, चूरा, बांज, आम, अखरोट, अमरूद, सेब, खुबानी, आड़, पुलम, चुलू आदि।

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