होली के बाद भाई-बहन के प्यार का प्रतीक पर्व भाई-दूज मनाया जाता है, यह भाई दूज चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है।
इस दिन बहनें भाइयों की रक्षा और उनके सफल जीवन के लिए तिलक करती हैं और शुभ फलों की कामना करती हैं और भाई बहनों की रक्षा का संकल्प लेते हैं। इसे भ्रातृ द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है।
इस दिन भाई अपनी बहन के घर जाते हैं और तिलक कराते हैं, बहनें भाइयों की लंबी उम्र की कामना करती हैं और प्रिय भोजन खिलाती हैं। भाई बहनों को गिफ्ट देते हैं।
इस साल भाई दूज की द्वितीया तिथि का शुभारंभ 26 मार्च को दोपहर 2 बजकर 55 मिनट से शुरू होगा और अगले दिन 27 मार्च को शाम 5 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, भाई दूज 27 मार्च को मनाया जाएगा।
वहीं भाई दूज पर तिलक करने का शुभ मुहूर्त 10 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा और 3 बजकर 31 मिनट से शुरू होकर 5 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में भाइयों का तिलक करें।
तिलक लगाने से पहले पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें, इसके बाद लाल चंदन से तिलक तैयार करें और यह तिलक भगवान विष्णु को लगाएं तत्पश्चात गणेश जी को भी तिलक लगाएं।
इसके बाद भाई को तिलक करें और तिलक करते समय भाई का मुंह उत्तर या फिर पूर्व दिशा में होना चाहिए। तिलक करने के बाद मिठाई खिलाएं।
इसके बाद भाई बहन को मिठाई खिलाएं और चरण स्पर्श करें। इसके बाद भाइयों को बहनों को अपने सामर्थ्य अनुसार उनकी पसंद का कोई गिफ्ट देना चाहिए।
भाई-बहन के अटूट प्यार का प्रतीक पर्व 27 मार्च को मनाया जाएगा, ऐसी ही अन्य खबरों के लिए पढ़ते रहें Jagran.Com