टीएमसी नेता वीर बहादुर सिंह झारखंड से गिरफ्तार, बंगाल चुनाव बाद पांडेश्वर में हिंसा और दबदबे का अंत
पांडवेश्वर ब्लॉक टीएमसी उपाध्यक्ष वीर बहादुर सिंह को अंडाल पुलिस ने झारखंड के मधुपुर से गिरफ्तार किया है। उनके खिलाफ चुनाव बाद हिंसा सहित कई मामले दर् ...और पढ़ें

टीएमसी नेता वीर बहादुर सिंह। (फाइल फोटो)
HighLights
टीएमसी नेता वीर बहादुर सिंह झारखंड के मधुपुर से गिरफ्तार।
अंडाल-पांडवेश्वर थानों में चुनाव बाद हिंसा के कई मामले।
पूर्व विधायक नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती के करीबी, दबदबे का अंत।
जागरण संवाददाता, दुर्गापुर। पश्चिम बंगाल के पांडवेश्वर ब्लाक तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) उपाध्यक्ष वीर बहादुर सिंह आखिरकार पुलिस की गिरफ्त में आ गए है, अंडाल थाने की पुलिस ने उन्हें झारखंड के मधुपुर से गिरफ्तार किया है, जिन्हें लेकर पुलिस अंडाल थाने के लिए रवाना हो गई है।
वीर बहादुर की तलाश काफी समय से हो रही थी। सिंह पांडेश्वर के पूर्व विधायक व टीएमसी के जिलाध्यक्ष नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती के करीबी थे। लेकिन वे फरार चल रहे थे। पुलिस उपायुक्त रसप्रिस सिंह ने उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है।
दो सप्ताह पहले वीर बहादुर ने एक वीडियो संदेश जारी किया था, जिसके बाद से राजनीति और गरमा गई थी, जिसमें उन्होंने टीएमसी के पूर्व जिलाध्यक्ष सह पूर्व विधायक नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती पर जमकर हमला बोला था एवं चुनाव परिणाम आने के बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं की खोजखबर नहीं लेने का आरोप लगाया था एवं जमकर भड़ास निकाली थी।
हालांकि पिछले पांच साल से भाजपा नेता जितेंद्र तिवारी पर निशाना साधने वाले वीर बहादुर ने अचानक सुर बदलते हुए गुनगान किया था। हालांकि वीडियो वायरल होने के बाद से अंडाल-पांडवेश्वर से लेकर कांकसा और पानागढ़ तक के लोग वीर बहादुर के अत्याचार की कहानी बयां इंटरनेट मीडिया पर गुस्सा निकाला था। यहां तक कहा जा रहा था वे भाजपा और पांडवेश्वर के विधायक जितेंद्र तिवारी का विश्वास जीतने की कोशिश कर रहे हैं।
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2021 में चुनाव बाद हिंसा का कई मामला दर्ज
भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से अंडाल एवं पांडवेश्वर थाने में वीर बहादुर सिंह के खिलाफ कई मामला दर्ज किया गया। कई लोगों ने आरोप लगाया कि 2021 के चुनाव के बाद उसके नेतृत्व में लोगों का घर लूटा गया, हमला किया गया।
यहां तक की काफी लोग घर छोड़कर चले गए थे, कई माह बाद जब वे वापस आएं तो रंगदारी वसूल किया गया। वहीं चुनाव के पहले ही वीर बहादुर की दादागिरी का एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें एक युवक को पिटते हुए वह केकेएससी कार्यालय ले जा रहे थे।
एक समय जितेंद्र तिवारी के थे करीबी
स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, वीर बहादुर ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत वामपंथी दलों के साथ की थी। बाद में राज्य में टीएमसी की सरकार बनने के बाद उनकी नजदीकियां तृणमूल नेताओं से बढ़ीं। वर्ष 2016 में जितेंद्र तिवारी के विधायक बनने के बाद वे उनके करीबी सहयोगी माने जाने लगे।
उनके समर्थन से वर्ष 2018 के पंचायत चुनाव में वीर बहादुर बहुला ग्राम पंचायत के प्रधान बने और इसके बाद क्षेत्र में उनका राजनीतिक प्रभाव लगातार बढ़ता गया। बताया जाता है कि वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले जब जितेंद्र तिवारी भाजपा में शामिल हुए, तब वीर बहादुर ने तत्कालीन टीएमसी विधायक नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती का साथ पकड़ लिया।
उनके संरक्षण में पांडवेश्वर ब्लाक और अंडाल क्षेत्र में उनका राजनीतिक कद और बढ़ा। स्थानीय लोगों का दावा है कि राजनीति के जरिए वीर बहादुर ने कम समय में काफी संपत्ति अर्जित की। लोगों के अनुसार, उन्होंने दसवीं तक पढ़ाई की थी और कुछ समय काम की तलाश में दिल्ली भी गए थे, लेकिन बाद में वापस लौटकर सक्रिय राजनीति में आ गए।
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद चार मई को मतगणना के दिन भी वीर बहादुर पूर्व विधायक नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती के साथ सक्रिय दिखाई दिए थे और उनके साथ धरने में भी शामिल हुए थे। इसके बाद से उनके क्षेत्र से गायब रहने की चर्चा भी स्थानीय स्तर पर होती रही।