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    हिमालय की तराई में बसा डालिम टार बर्ड वॉचिंग के शौकीनों के लिए स्वर्ग, फोटोग्राफी और ट्रेकिंग का भी लें आनंद

    By Gaurav MishraEdited By: Garima Singh
    Updated: Fri, 31 Jul 2026 04:48 PM (IST)

    गोरूबथान के पास स्थित डालिम टार अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक डालिम फोर्ट और शांत वातावरण के कारण उत्तर बंगाल का एक उभरता पर्यटन स्थल बन रहा है। ...और पढ़ें

    डालिम टार के नैसर्गिक सौंदर्य को निहारते पर्यटक

    डालिम टार के नैसर्गिक सौंदर्य को निहारते पर्यटक

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    संक्षेप में पढ़ें

    गौरव मिश्र, सिलीगुड़ी। हिमालय की तराई में बसा कालिम्पोंग जिले का गोरूबथान अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए पर्यटकों को आकर्षित करता ही है, अब इस क्षेत्र में स्थित डालिम टार भी उत्तर बंगाल का उभरता हुआ प्रमुख पर्यटन स्थल बन रहा है।

    लेपचा समुदाय के गौरवशाली इतिहास, प्राचीन किले के खंडहर, मनमोहक विहंगम दृश्य और शांत वातावरण यहां आने वाले पर्यटकों को एक यादगार अनुभव प्रदान करते हैं। जो लोग भीड़-भाड़ वाले हिल स्टेशनों से हटकर शांत, ऐतिहासिक और प्राकृतिक अनुभव चाहते हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन विकल्प है।

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    डालिम टार उत्तर बंगाल का उभरता पर्यटन स्थल

    डालिम टार गोरूबथान से मात्र छह किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां 19वीं सदी में निर्मित डालिम फोर्ट सबसे बड़ा आकर्षण है। लेपचा राजाओं द्वारा बनवाया गया यह रणनीतिक किला उस समय प्रशासनिक और सैन्य केंद्र था। आज किले के अवशेष पर्यटकों को इतिहास की सैर कराते हैं।

    खंडहरों में बची पुरानी दीवारें और संरचनाएं लेपचा राजा गैब्बो अच्योक की वीरता की कहानियां सुनाती हैं। स्थानीय लोककथाओं में राजा के संघर्ष और बलिदान की मार्मिक गाथाएं जुड़ी हुई हैं। यह पर्यटकों को रोचक लगती हैं।

    ऐतिहासिक लेपचा संस्कृति का अनुभव

    वर्ष 2008 में बंगाल सरकार द्वारा डालिम फोर्ट को हेरिटेज संपत्ति घोषित किए जाने के बाद इस स्थान की पर्यटन क्षमता और बढ़ी। हालांकि, संरक्षण कार्य अभी और तेज करने की जरूरत है, लेकिन विरासत का दर्जा मिलने से पर्यटकों की दिलचस्पी बढ़ी है।

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    लंबे समय तक दुर्गम रास्तों के कारण डालिम टार पर्यटकों की पहुंच से दूर रहा, लेकिन वर्ष 2013 में सड़क संपर्क बेहतर होने के बाद स्थिति बदल गई। 2017 के बाद यहां पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। अब आसानी से पहुंचने वाले यात्री यहां प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक महत्व दोनों का आनंद लेते हैं।

    सिलीगुड़ी, कालिम्पोंग या गोरूबथान से एक दिन की ट्रिप के रूप में या सप्ताहांत गेटवे के रूप में यहां आया जा सकता है। बेहतर होमस्टे सुविधाओं, गाइडेड हेरिटेज वाक और इको-टूरिज्म गतिविधियों के साथ यह स्थल जल्द ही बड़े पर्यटन मानचित्र पर अपनी जगह बनाने की क्षमता रखता है।

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    बर्ड वाचिंग के लिए डालिम टार स्वर्ग

    इसके अलावा, बर्ड वाचिंग के शौकीनों के लिए डालिम टार स्वर्ग है। विभिन्न प्रजातियों के पक्षी यहां आसानी से दिखाई देते हैं।

    शांत वातावरण, घने जंगल और पहाड़ी नदियां प्रकृति फोटोग्राफी और ट्रेकिंग के लिए भी उपयुक्त हैं। चेल नदी के किनारे टहलना पर्यटकों को आकर्षित करता है।

    लेपचा संस्कृति और व्यंजन का लुफ्त

    स्थानीय लोगों ने पर्यटन को अपनी आजीविका से जोड़ लिया है। प्रभात राई जैसे लोग होमस्टे संचालित कर रहे हैं, जहां पर्यटक लेपचा संस्कृति, स्थानीय व्यंजनों और पारंपरिक जीवनशैली से रू-ब-रू हो सकते हैं।

    लगभग 700 आबादी वाले इस पठार पर अभी लेपचा समुदाय की संख्या कम है, लेकिन बाकी बसे हुए लोग मेहमाननवाजी के लिए प्रसिद्ध हैं।

    कैसे और कब आएं?

    यहां आने के लिए सिलीगुड़ी से सड़क मार्ग से गोरूबथान पहुंचें। वहां से यह नजदीक है। सिलीगुड़ी से यहां की दूरी करीब 60 किलोमीटर है। करीब दो घंटे की यात्रा कर यहां पहुंच सकते हैं।

    सितंबर के बाद अप्रैल से पहले यहां का मौसम बहुत उपयुक्त माना जाता है। स्थानीय होमस्टे बुक करके लेपचा आतिथ्य का पूरा आनंद ले सकते हैं।