बंगाल:सावन में जलपेश धाम में उमड़ेगा शिवभक्तों का सैलाब, पहुंचेंगे लाखों श्रद्धालु, सुरक्षा के व्यापक इंतजाम
बंगला पंचांग के अनुसार 20 जुलाई से सावन माह शुरू होने पर बाबा जलपेश मंदिर में लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।। ...और पढ़ें

जलपेश धाम में उमड़ेगा शिवभक्तों का सैलाब

समय कम है?
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मनोज कुमार ठाकुर, जलपाईगुड़ी। बंगला पंचांग के अनुसार 20 जुलाई से सावन (श्रावण) माह की शुरुआत के साथ ही उत्तर बंगाल के प्रसिद्ध शिवधाम बाबा जलपेश मंदिर में आस्था का महाकुंभ शुरू हो गया है। सावन के पहले सोमवार को लाखों श्रद्धालुओं के जलाभिषेक के लिए पहुंचने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन, पुलिस और जलपेश मंदिर ट्रस्ट बोर्ड ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं।
मौसम अनुकूल रहने पर श्रद्धालुओं के स्वागत में मंदिर परिसर में हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा भी की जाएगी।
सावन के दौरान पश्चिम बंगाल के अलावा असम, सिक्किम, बिहार, झारखंड, ओडिशा, भूटान और बांग्लादेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा जलपेश के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। पहले सोमवार और पूरे श्रावणी मेले के दौरान मंदिर परिसर श्रद्धालुओं, साधु-संतों और कांवड़ियों से गुलजार रहता है।
800 वर्ष पुराना है जलपेश धाम का इतिहास
जलपाईगुड़ी जिले के मयनागुड़ी में स्थित जलपेश मंदिर उत्तर बंगाल का सबसे प्रमुख शिवधाम माना जाता है। मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग स्वयंभू है और सदैव जल से घिरा रहता है। श्रद्धालुओं को शिवलिंग के दर्शन के लिए नीचे उतरना पड़ता है।
इतिहासकारों और स्थानीय परंपराओं के अनुसार, मंदिर का इतिहास लगभग 800 वर्ष पुराना है। माना जाता है कि 12वीं शताब्दी में भूटान के राजा जितारी मुनि ने इसकी स्थापना कराई थी। बाद में कूचबिहार के राजा प्राण नारायण ने 17वीं शताब्दी में इसका पुनर्निर्माण कराया। कई बड़े भूकंपों के बावजूद मंदिर का बार-बार पुनर्निर्माण हुआ और आज का स्वरूप अस्तित्व में आया।
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सावन में क्यों बढ़ जाती है आस्था?
श्रावण मास भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है। श्रद्धालु तीस्ता नदी सहित विभिन्न नदियों से जल लाकर बाबा जलपेश का जलाभिषेक करते हैं। हजारों कांवड़िए पैदल यात्रा कर मंदिर पहुंचते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से जलाभिषेक करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
पहाड़ और मैदानी इलाकों में लगातार बारिश के कारण तीस्ता नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। सिंचाई विभाग ने दोमोहनी से मेखलीगंज तक सतर्कता जारी की है।
श्रावण माह में लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। लगभग 150 स्वयंसेवक सेवा में लगाए गए हैं और सुरक्षा व सुविधा के सभी इंतजाम किए गए हैं। गिरिन देव, सचिव, जलपेश मंदिर ट्रस्ट बोर्ड
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए
- तीस्ता घाट पर मजबूत बैरिकेडिंग और सुरक्षा जाल लगाया गया है।
- सिविल डिफेंस एवं डिजास्टर मैनेजमेंट की टीमें तैनात रहेंगी।
- कई नाव और स्पीड बोट तैयार रखी गई हैं।
- पुलिस एवं प्रशासन लगातार निगरानी करेगा।
30 पुलिस पोस्ट, अतिरिक्त पुलिस बल तैनात
श्रावणी मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए तीस्ता घाट से जलपेश मंदिर तक 30 पुलिस पोस्ट बनाए गए हैं। अन्य जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी होगी।
तीस्ता नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए घाट और मंदिर परिसर में व्यापक इंतजाम किए गए हैं। कुमुद रंजन राय, अध्यक्ष, मयनागुड़ी पंचायत समिति
नया ट्रैफिक प्लान लागू
- यातायात को सुचारु रखने के लिए इस बार नया रूट प्लान लागू किया गया है।
- श्रद्धालु तीस्ता घाट से जल लेकर मयनागुड़ी इंदिरा मोड़ के रास्ते जलपेश मेला मैदान पहुंचेंगे।
- जलाभिषेक के बाद वापसी पुराने मार्ग से नहीं होगी।
- वापसी के लिए सरस्वती ब्रिज होते हुए एशियन हाईवे का उपयोग किया जाएगा।
- कूचबिहार, माथाभांगा, चेंगड़ाबांधा और मेखलीगंज की ओर से आने वाले वाहनों को राजारहाट मोड़ से होकर तीस्ता घाट भेजा जाएगा।
- रविवार शाम से सोमवार सुबह तक एशियन हाईवे और ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के कुछ हिस्सों में यातायात नियंत्रित रहेगा।
150 स्वयंसेवक संभालेंगे व्यवस्था
जलपेश मंदिर ट्रस्ट बोर्ड के सचिव गिरिन देव ने बताया कि पूरे सावन महीने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहने की संभावना है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए करीब 150 स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है। मंदिर में सीसीटीवी, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं का भी प्रबंध किया गया है।
पश्चिम बंगाल, असम, सिक्किम, बिहार, झारखंड, ओडिशा, भूटान और बांग्लादेश से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।