बंगाल उपचुनाव में विपक्षी जगह के लिए मुकाबला, तृणमूल के विभाजन से बदले समीकरण
बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव तृणमूल कांग्रेस के विभाजन के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों की परीक्षा ...और पढ़ें
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HighLights
तृणमूल कांग्रेस के विभाजन से बंगाल उपचुनाव में बदले समीकरण।
नंदीग्राम और रेजीनगर सीटें विपक्षी राजनीति की बनेंगी परीक्षा।
कांग्रेस, वामदल, भाजपा भी अपनी राजनीतिक स्थिति साध रहे।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव तृणमूल कांग्रेस के विभाजन के बाद विपक्षी राजनीति में बदले समीकरण की परीक्षा बन गए हैं। एक ओर ममता तृणमूल और अरूप राय के नेतृत्व वाला गुट खुद को तृणमूल की राजनीतिक विरासत का दावेदार बता रहा है, वहीं कांग्रेस और वामदल तृणमूल के कमजोर हुए जनाधार में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
नंदीग्राम में ममता तृणमूल की प्रत्याशी संचिता प्रधान दे ने उम्मीदवारी वापस ले ली। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन दिया। हालांकि, 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े मामलों में मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
दूसरी ओर, अरूप राय गुट की डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस ने मोहम्मद एतेशामुल हक को प्रत्याशी बनाया है। ऐसे में नंदीग्राम में ममता तृणमूल के नए चुनावी अस्तित्व के साथ कांग्रेस की राजनीतिक वापसी की भी परीक्षा होगी।
रेजीनगर में छह प्रमुख प्रत्याशियों के बीच मुकाबला
मुर्शिदाबाद के रेजीनगर में दोनों तृणमूल गुट आमने-सामने हैं। ममता तृणमूल के रबिउल आलम चौधरी ने पहले दबाव का हवाला देकर नामांकन वापस लेने की घोषणा की थी, लेकिन बाद में ममता बनर्जी से बातचीत के बाद उन्होंने फैसला बदल दिया।
रेजीनगर में चौधरी के सामने डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के सफीउज्जमां शेख, कांग्रेस के मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफि, माकपा के सैयद असद अली, आम जनता उन्नयन पार्टी के गुलाम नबी आजाद और भाजपा के सखाराव सरकार हैं।
अल्पसंख्यक बहुल इस सीट पर तृणमूल के विभाजन के बाद मतदाताओं के रुझान में बदलाव का भी संकेत मिलने की बात राजनीतिक विश्लेषक कह रहे हैं। तृणमूल के नाम और पुराने चुनाव चिह्न पर रोक के बाद निर्वाचन आयोग ने ममता गुट को ‘ममता आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबाल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न तथा अरूप राय गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न दिया है।
इस बदली पहचान के बीच दोनों सीटों का मुकाबला कांग्रेस, वामदल और भाजपा के लिए भी अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट करने का अवसर बना है।
