बंगाल में भाजपा सरकार का ‘डबल एजुकेशन मॉडल’, विद्यालय शिक्षा और उच्च शिक्षा को दो भागों में बांटने की तैयारी
बंगाल में भाजपा सरकार प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है, जिसमें मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की राज्यपाल से मुलाकात के बाद मंत्रिमंडल ...और पढ़ें

बंगाल में भाजपा सरकार का ‘डबल एजुकेशन मॉडल। (पीटीआई)
HighLights
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्यपाल से की लंबी मुलाकात।
बंगाल मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें हुईं तेज, नए मंत्री।
शिक्षा विभाग को दो हिस्सों में बांटने की तैयारी।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में भाजपा सरकार अब प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी में है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को लोक भवन में राज्यपाल आरएन रवि से करीब एक घंटा चालीस मिनट लंबी बैठक की, जिसके बाद राज्य मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज हो गई हैं।
माना जा रहा है कि आगामी बजट सत्र से पहले पूर्ण मंत्रिमंडल का गठन कर लिया जाएगा और नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी।
शिक्षा विभाग फिर दो हिस्सों में बंटेगा
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा सरकार शिक्षा विभाग को फिर दो हिस्सों विद्यालय शिक्षा और उच्च शिक्षा में बांटने जा रही है। वाममोर्चा शासनकाल में यही व्यवस्था लागू थी, जहां दोनों विभागों के लिए अलग-अलग मंत्री होते थे। तृणमूल सरकार ने बाद में इन विभागों को मिलाकर एकल शिक्षा विभाग बना दिया था। अब भाजपा का मानना है कि अलग मंत्रालय बनने से प्रशासनिक गति बढ़ेगी और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही मजबूत होगी।
मंत्रिमंडल गठन में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर जोर
राज्य भाजपा नेतृत्व मंत्रिमंडल गठन में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर विशेष ध्यान दे रहा है। उत्तर बंगाल, जंगलमहल और अल्पसंख्यक बहुल इलाकों से प्रतिनिधित्व बढ़ाने की रणनीति बनाई गई है। भाजपा के 207 विधायकों में प्रशासनिक अनुभव वाले नेताओं की संख्या सीमित होने के कारण चयन प्रक्रिया सावधानी से की जा रही है।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य हाल ही में दिल्ली जाकर केंद्रीय नेतृत्व से संभावित मंत्रियों के नामों और विभागों पर चर्चा कर चुके हैं। मौजूदा मंत्रियों दिलीप घोष, अग्निमित्रा पाल, निशिथ प्रमाणिक, अशोक कीर्तनिया और खुदिराम टुडु के कुछ विभाग नए चेहरों को सौंपे जा सकते हैं।
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हालांकि गृह और सूचना-संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विभाग मुख्यमंत्री अपने पास ही रख सकते हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि 22 जून को प्रस्तावित भाजपा सरकार के पहले पूर्ण बजट से पहले कैबिनेट विस्तार प्रशासनिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।