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पश्चिम बंगाल में BJP की बूथ प्रबंधन रणनीति, कार्यकर्ताओं को दिया ये टास्क; ममता के गण में कैसे सेंध लगाएगी भाजपा?

Published: Sun, 12 Apr 2026 10:33 PM (IST)Updated: Sun, 12 Apr 2026 10:38 PM (IST)

भाजपा ने पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों के लिए अपनी बूथ प्रबंधन रणनीति को मजबूत किया है। पार्टी ने 90% ...और पढ़ें

बीजेपी ने कोलकाता में बूथों पर तैयार की रणनीति (फोटो-पीटीआई)

बीजेपी ने कोलकाता में बूथों पर तैयार की रणनीति (फोटो-पीटीआई)

HighLights

  1. बूथों की लड़ाई के लिए कमर कस तैयार भाजपा

  2. हिंदुओं को एकजुट करने के लिए चल रहा अभियान

नीलू रंजन, कोलकाता। पिछले चुनाव की एक बड़ी कमी को भाजपा ने इस बार मजबूती में बदल दिया है। रैलियों, रोडशो और नुक्कड़ सभाओं के जरिए जहां नैरैटिव तैयार हो रहा है, वहीं लड़ाई के असली मैदान- बूथों पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।

पश्चिम बंगाल में कुल 85,379 बूथ हैं और इनमें मुस्लिम बहुल बूथों को छोड़कर भाजपा न सिर्फ 90 फीसद बूथों पर बूथ कमेटियों का गठन कर चुकी है, बल्कि उनकी तैयारियों पर लगातार नजर भी रखी जा रही है।

इतना ही नहीं कार्यकर्ताओं को इसके लिए तैयार किया जा चुका है कि अंतिम वक्त तक बूथ न खाली होने पाए। पिछली बार बड़ी संख्या में बूथ से कार्यकर्ता गायब हो गए थे।

बूथ-लेवल पर ध्यान दे रहे BJP कार्यकर्ता

दरअसल चुनावों में बूथ प्रबंधन भाजपा की सबसे बड़ी ताकत रही है और इसी के बल पर एक के बाद एक चुनाव में विरोधियों को मात देती रही है। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद कर उन्हें बूथ प्रबंधन का गुर सिखाते रहे हैं।

2019 के बाद प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता के बाद भाजपा का वोटशेयर तो तेजी बढ़ा और लोकसभा व विधानसभा चुनाव में सीटों में गुणात्मक बढ़ोतरी हुई। लेकिन पहले 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कमी दिखी थी। पश्चिम बंगाल में हिंसा के कारण वोटर तब और भी छिटक गए थे जब बूथ पर कार्यकर्ता ही नहीं दिखे थे।

हिंदुओं को एकजुट करने के लिए बड़ा अभियान

पश्चिम बंगाल आरएसएस के एक प्रमुख नेता के अनुसार इस बार विधानसभा चुनाव राज्य में बांग्लाभाषी हिंदुओं का अस्तित्व तय करेगा। इसे देखते हुए जमीनी स्तर पर हिंदुओं को एकजुट करने के लिए बड़ा अभियान चलाया जा रहा है।

चुनावी हिंसा और डर दिखाकर मतदाताओं को बूथ तक नहीं पहुंचने देने की पश्चिम बंगाल की पुराने रिकार्ड के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस बार सभी कार्यकर्ताओं को बूथ को सुरक्षित करने और मतदाताओं को बिना डर के मतदान सुनिश्चित करने के लिए कह दिया गया है।

आरएसएस नेता ने कहा कि चुनावी हिंसा में घर के भीतर मरने के बजाय बदलाव के सिपाही इस बार बूथ पर जाकर जान देना पसंद करेगा।

2021 में बहुत सारे बूथों से भाजपा के कार्यकर्ताओं को भगा दिया गया था। उन्होंने कहा कि इस बार ऐसा एक भी बूथ नहीं होगा। बड़ी संख्या में आरएसएस के स्वयंसेवक दूसरे राज्यों से आकर जन जागरण के काम में जुटे हुए हैं।

BJP ने संगठन मंत्रियों को सौंपी जिम्मेदारी

चुनाव के दौरान बूथों के बेहतर प्रबंधन के लिए भाजपा ने पश्चिम बंगाल को पांच भागों में विभाजित कर अलग-अलग संगठन मंत्रियों को इसकी जिम्मेदारी है।

पूर्वोत्तर में लंबे समय काम कर चुके अनंत नारायण मिश्र को सिलिगुड़ी, दार्जलिंग समेत पूरे उत्तर बंगाल में संगठन की जिम्मेदारी गई है।

इसी तरह से हावड़ा, हुगली, मेदनीपुर इलाके में दिल्ली के संगठन सचिव पवन राणा, कोलकाता व दक्षिण परगना में हिमाचल प्रदेश के संगठन सचिव सिद्धार्थन, नबद्वीप और उत्तरी परगना में आंध्रप्रदेश के संगठन सचिव एन मधुकर के साथ ही पुरुलिया, बांकुड़ा और वर्धमान में छत्तीसगढ़ के संगठन सचिव पवन साय को लगाया गया है।

ये सभी संगठन सचिव अक्टूबर से लगातार भाजपा की सांगठिक कमजोरियों की दूर करने और बूथ स्तर पर मजबूत ढांचा तैयार में जुटे हैं। इनमें एक संगठन सचिव ने दावा किया कि इस बार बूथ प्रबंधन में भाजपा किसी भी स्तर पर तृणमूल कांग्रेस से कमजोर साबित नहीं होगा।

शक्ति केंद्रों की जिम्मेदारी राज्य के बाहर से आए नेताओं को सौंप कर हर बूथ पर नजर रखी जा रही है। एक शक्तिकेंद्र में तीन से पांच बूथ आते हैं और लगातार बैठक बूथ स्तर पर राजनीतिक हलचलों की समीक्षा भी की जा रही है।

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